(39) हम मतवाले नौजवान।
पंकज खन्ना
"हम मतवाले नौजवान" किशोर कुमार के शुरुआती जोशीले युवा ऊर्जा वाले गीतों में से एक है। खुशकिस्मती से ये साइकिल गीत भी है। ये समाज की संकीर्ण सोच के विरुद्ध एक मस्त, बेबाक ऐलान जैसा लगता है।
गीतकार हसरत जयपुरी की लिखी इसकी पहली ही लाइन, "हम मतवाले नौजवान, मंज़िलों के उजाले..." उस दौर के युवाओं के आत्मविश्वास और आशावाद का प्रतीक है। पहले ऐसे नौजवान होते थे जो खुद को मतवाले नौजवान बोलते थे और मानते भी थे।
(दुःख होता है जब आज के कुछ होनहार नौजवान अपने आप को कॉकरोच कहलवाना पसंद करते हैं। ये बच्चे, अच्छे मतवाले नौजवानों के समान अपने आप को पेश करेंगे तो अपनी सही और उचित बात को बहुत अच्छी तरह समझा पाएंगे, ऐसा हमारा मत है।)
और वहीं मुखड़े की लाइन "लोग करें बदनामी, कैसे ये दुनिया वाले..." समाज की उस प्रवृत्ति पर व्यंग्य करती है, जिसमें नेक इरादों को भी गलत ही समझा जाता है।
"हम मतवाले नौजवान" एक घोषणा है कि युवा वह है जो दुनिया की आलोचना से डरकर नहीं रुकता और अपनी मंज़िल को पाकर रहता है।
यह गीत किशोर कुमार की स्वाभाविक चंचलता, खिलंदड़ेपन और लयबद्ध गायकी का शानदार उदाहरण है। उनकी आवाज़ और हरकतों में शरारत भी है, आत्मविश्वास भी और एक मासूम विद्रोह भी जिसे समाज के सभी पक्ष सम्मान के साथ सहर्ष स्वीकार करते हैं।
जब फिल्म का नाम ही 'शरारत' हो, तो किशोर कुमार तो जी भर कर शरारत करेंगे ही। उनका चलना, उछलकूद करना, स्टाइल से साइकिल इधर-उधर झुलाकर चलाना, हाथों को लयबद्ध लेकिन द्रुत गति से दाएं-बाएं हिलाना और सिर्फ होठों से ही नहीं बल्कि पूर्ण चेहरे से मुस्कुराना सच में गजब ढा देता है।
किशोर कुमार का पूरा शरीर ही उनका चलता फिरता वाद्ययंत्र होता था। आंखें, चेहरा, हाथ, पैर, हरकतें, शरारतें और आवाज़; सभी कुछ संगीतमय था। और कोई ऐसा आत्मा वाला वाद्य यंत्र आपको याद आता है क्या?
कह सकते है कि यह गीत वास्तव में "किशोर कुमार स्कूल ऑफ़ स्क्रीन परफ़ॉर्मेंस" का एक उत्कृष्ट नमूना है। इस गीत की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें किशोर कुमार अभिनय नहीं करते हैं। वे स्वयं को पर्दे पर जीते हैं।
यही शैली आगे चलकर उनकी "एक चतुर नार" जैसी अनेक प्रस्तुतियों में और विकसित दिखाई देती है।
उनकी साइक्लिंग को आसानी से साइकिल डांस कहा जा सकता है। इतनी सहजता से साइकिल चलाना, अभिनय करना, साथ में गाना भी गाना और लोगों को हँसाना; ऐसा सिर्फ किशोर ही कर सकते हैं।
(आपकी जानकारी के लिए, आज के साइकिल गीत के पहले, साइकिल संगीत में निम्नलिखित गीतों में सिंगर और एक्टर एक ही थे:
(22) गीत: दुनिया हमारे प्यार की यूँ ही जवां रहे। गायक: करण दीवान। पर्दे पर: करन दीवान और नर्गिस।
(23) गीत: साइकिल की सवारी है।गायक: सुंदर सिंघ। गायिका: रमोला। पर्दे पर: रमोला और सुंदर सिंघ ( कॉमेडियन सुंदर)।
(24) गीत: नैनों के तीर चला गई एक शहर की लौंडिया। गायक: सुंदर सिंघ। पर्दे पर: सुंदर और रमोला।)
शंकर जयकिशन ने आज के इस गीत हम मतवाले नौजवान में तेज़ रफ्तार ऑर्केस्ट्रेशन और मधुर लय का प्रयोग किया है। गीत में हास्य और मस्ती भी बराबर बनाए रखी है। धुन में पश्चिमी संगीत का प्रभाव है, लेकिन उसका उत्साह पूरी तरह भारतीय फिल्मी अंदाज़ का है।
जवानी के दिनों की तो बात ही छोड़िए, आज भी ऐसे साइकिल वाले गानों की लाइनें दिल के तारों को छेड़ जाती हैं। सच कहूँ तो, पूरी जिंदगी इसी टाइप के फलसफे पर पैडल मारा है और अपनी ही धुन में अपना रास्ता तय किया है। भले ही ये तय किया गया रास्ता बहुत कम रहा हो लेकिन मजेदार जरूर रहा है। नादाँ है जहां, समझेगा कहां!
यकीन मानिए, इस गाने की धुन कानों में पड़ते ही आज भी नसों में आगे बढ़ने का एक तूफानी जोश दौड़ जाता है।
हालांकि, फिर कभी-कभी खुद पर ही हंसते हुए सोचता हूँ कि भई, अब और आगे जाएंगे कहाँ? अब तो अगला सीधा स्टॉप बस 'बैकुंठ धाम' या फिर 'यमलोक' ही नजर आता है! सोचने में क्या जाता है; हो सकता है साइकिल का यही रास्ता बैकुंठ धाम पहुंचा दे!
लेकिन खैर, जब तक वहाँ का टिकट कन्फर्म नहीं होता, तब तक क्यों न जिंदगी की इस साइकिल को थोड़ा और दौड़ा लिया जाए? जंगलों, वादियों, गांवों और शहरों की गलियों के बीच थोड़ा और पैडल मार लें, मस्ती में थोड़ा और नाच-गा लें। और हाँ, अपने इस 'साइकिल संगीत' का जो सुरमयी कोर्स शुरू किया है, उसे भी तरीके से, सलीके से एक खूबसूरत अंजाम तक पहुँचाना भी अभी शेष है।🙏
लिखते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि आज के इस सुरीले तराने के साथ हमारी 'साइकिल संगीत' की सुहानी यात्रा का पहला पड़ाव अपनी मंजिल तक पहुँच ही गया है! इस संगीतमय सफर में हमने 1940 और 1950 के दशक की सुनहरी यादों की पगडंडियों पर पैडल मारते हुए पूरे 38 शानदार साइकिल गीतों का आनंद लिया है।
लेकिन क्या पता, पुरानी यादों के इस खजाने में कोई अनमोल धुन हमसे पीछे छूट गई हो? अगर आपके ज़ेहन में सिर्फ 30, 40 या 50 के दशक का कोई भी ऐसा साइकिल गीत है जिसका जिक्र होने से रह गया हो, तो कृपया जरूर बताएं! 🙏🙏
आपके द्वारा बताए गए उस बेशकीमती गीत को, पूरे सम्मान और आपके नाम (फुल क्रेडिट) के साथ, 'साइकिल संगीत' के अगले सफर में शान से शामिल करेंगे।
(साइकिल संगीत के अभी तक लिखे गए सभी 39 ब्लॉग पोस्ट और 38 साइकिल गीतों की सूची इस ब्लॉग पोस्ट के अंत में भी दी गई है।)
अब हमारी यह म्यूजिकल साइकिल कुछ महीनों का एक छोटा-सा 'पिट स्टॉप' (ब्रेक) लेगी। इसके बाद हम फिर से घंटी और सीटी बजाते हुए निकलेंगे 'साइकिल संगीत' के दूसरे भाग की ओर, जहाँ 60 के दशक के सदाबहार साइकिल गीतों की महफ़िल सजेगी! ( कुल यात्रा चार भागों में पूर्ण की जाएगी।)
तब तक, आप आराम से प्रथम भाग के इन 38 गीतों की प्लेलिस्ट में गोते लगाइए, इन्हें सुनिए, गुनगुनाइए और गाइए, लेकिन अकेले में प्लीज़!😉
और इस जिंदगी नाम के सुहाने सफर का मज़ा लीजिए, साइकिल चलाते हुए।🚴♀️🚴🚴♂️
पंकज खन्ना
9424810575
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