(9) देखी पंछी ये फुलवारी।
गीत: देखी-देखी पंछी, देखी ये फुलवारी। (जलदीप) (1956) गायक : स्नेहल भाटकर और साथी। गीतकार : किदार शर्मा। संगीतकार: स्नेहल भाटकर। निर्माता: बाल चित्र समिति। (Children's Film Society. CFSI)
फिल्म जलदीप (1956) बाल चित्र समिति (Children's Film Society India, CFSI) द्वारा बनाई गई पहली बाल फिल्म थी। साठ और सत्तर के दशक में स्कूलों और मोहल्लों में CFSI द्वारा बनाई गई फिल्में 16 mm के प्रोजेक्टर पर अक्सर दिखाई जाती थीं, विशेषतः बाल दिवस पर। सभी बच्चे इन फिल्मों को बड़े शौक और उत्साह से देखते थे। बड़े लोग भी देख लिया करते थे। उस जमाने में तो लगभग सभी फुरसत में रहते थे। ( अब हम विकासशील लोग बस जुगाड़ या फितरत में रहते हैं; फुरसत में तो बिल्कुल नहीं। )
बाल फिल्म जलदीप का कथानक कुछ यूं है:
अशोक (अशोक शर्मा, किदार शर्मा के पुत्र) अपनी कज़िन प्रीति (प्रीतिबाला उर्फ ज़ेब रहमान ) को जलदीप अर्थात लाइटहाउस ले जाने का फ़ैसला करता है। चंदन, एक लापरवाह लड़का, अशोक और प्रीति को लेकर नाव चलाता है। दिखावा करने के चक्कर में, वह बेवजह रिस्क लेता है और खतरे को न्योता देता है। मामला और बिगड़ जाता है, क्योंकि नाव अचानक आए तूफ़ान में फँस जाती है। नाव पर सवार तीनों लगभग खतरे में पड़ जाते हैं, जब तक कि अशोक के पिता, जो लाइटहाउस (जलदीप) कीपर हैं, उन्हें बचा नहीं लेते। शर्मिंदा चंदन अच्छा बच्चा बनकर एक नई ज़िंदगी शुरू करता है।
आज का साइकिल गीत बचपन से जुड़ा होने के कारण दिल में विशेष स्थान रखता है। इस गाने में, बच्चे स्कूल के वार्षिक प्रोग्राम के बाद साइकिल से हंसते-गाते घर लौट रहे हैं।
गाने की शुरुआत में सुंदर ग्रामीण पृष्ठभूमि में कुछ बैलगाड़ियां दिखाई देती है और उनके पीछे बच्चे गाते हुए साइकिल पर दिखाई देते हैं। कुछ बच्चे बेलगाड़ी पर बैठे और गाते भी दिखाई देते हैं। एक प्यारा सा गोलू बालक 'दुबे' भी बैलगाड़ी पर बैठा है, गाता नाचता हुआ।
एक साइकिल वाली एक हाथ से बैलगाड़ी के पिछले हिस्से को पकड़ कर साइकिल और बैलगाड़ी दोनों का आनंद ले रही है। एक बालक को गधे की सवारी करते भी दिखाया गया है।
गाने में अशोक अपनी फिल्म की बहन प्रीति को बैठाकर साइकिल चला रहे हैं और स्नेहल भाटकर की आवाज में गा रहे हैं: देखी पंछी ये फुलवारी। बाकी बच्चे कोरस में गा रहे हैं।
देखी देखी, देखी देखी देखी, देखी पंछी, पंछी देखी ये फुलवारी, पंछी देखी ये फुलवारी-2
कैसी प्यारी है हर क्यारी, कैसी प्यारी है हर क्यारी। पंछी देखी ये फुलवारी। पंछी देखी ये फुलवारी।
दुल्हन बन कर शाखें झूमें, माएँ बच्चों का मुंह चूमें।
इत हरियाली, उत हरियाली। है कोई बड़ा सियाना माली जिसने की है ये गुलकारी।
देखी देखी, देखी देखी देखी, देखी पंछी, पंछी देखी ये फुलवारी, पंछी देखी ये फुलवारी।
देखि निर्मल जल की धारा, पिघली चांदी बहता पारा। छोटे पौधे ऊंचे मंदिर।
जल बाहर, जल के अंदर। है ये किसकी महिमा सारी।
देखी देखी, देखी देखी देखी, देखी पंछी, पंछी देखी ये फुलवारी, पंछी देखी ये फुलवारी
सुंदर फूल कहीं हैं पीले, उदे लाल, बसंती, नीले। वो काले भँवरों की टोली। कैसी खेली सब ने होली। ना है रंग, ना है पिचकारी।
देखी देखी, देखी देखी देखी, देखी पंछी, पंछी देखी ये फुलवारी, पंछी देखी ये फुलवारी।
सारी दुनिया जब है सोती, शबनम लाती है कुछ मोती। किरणें सूरज की आती हैं,ये सब मोती ले जाती है। दे कर गोटा और किनारी।
देखी देखी, देखी देखी देखी, देखी पंछी, पंछी देखी ये फुलवारी, पंछी देखी ये फुलवारी।
कैसी प्यारी है हर क्यारी, कैसी प्यारी है हर क्यारी। पंछी देखी ये फुलवारी। पंछी देखी ये फुलवारी।
देखी देखी, देखी देखी देखी, देखी पंछी, पंछी देखी ये फुलवारी, पंछी देखी ये फुलवारी।
इस बाल फिल्म में तीन ही गीत हैं। तीनों ही सरल भाषा में हैं। मधुर और श्रेष्ठ हैं। सादगी की मिसाल हैं।
दूसरा गीत है तू अपने मन का दीप जला । इसे गाया है सुधा मल्होत्रा और स्नेहल भाटकर ने। गीत नहीं भजन है, प्रेरणा है। आप से अनुरोध है इसे अवश्य सुनें और हो सके तो मन ही मन गाएँ भी। बच्चों को सुनाएं भी। शायद वो एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देंगे; तब भी सुनाएं! कोशिश करें। ये गीत मन को हल्का करेगा, अच्छा लगेगा।
तीसरा गीत है: छोटा सा पप्पू हूँ। इसे गाया है बालक दुबे और प्रीतिबाला ( ज़ेब रहमान ) ने। थोड़ा मस्ती भरा गीत है। आखिर बाल फिल्म का गीत है। इस प्यारे गाने को सुनने के बाद ना तो आपको पप्पू कांट डांस साला गाना है और ना ही इसमें किसी राजनीति वाले को देखना है। और ये गीत फॉरवर्ड तो बिल्कुल ही नहीं करना है। लोग बिन बादल बरस पड़ेंगे आप पर!
इन तीनों गानों को सुनने के बाद बस यही विचार आता है कि ऐसे गाने और ऐसा संगीत क्यों गुमनाम है। इन गीतों की सादगी दिल और दिमाग पर हमेशा के लिए छा जाती है। और इनके संगीत के बारे में तो क्या ही लिखें। बस सुनते रहें और गायक संगीतकार स्नेहल भाटकर का गुणगान करते रहें।
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