(22) या (3A): दुनिया हमारे प्यार की यूं ही जवां रहे।

पंकज खन्ना
9424810575

       



     (फिल्म लाहौर (1949) पोस्टर)

गीत: दुनिया हमारे प्यार की यूँ ही जवां रहेफिल्म: लाहौर (1949)।  गायक: करण दीवान। गायिका: लता। गीतकार: राजिंदर कृष्ण। संगीतकार: श्याम सुंदर। पर्दे पर: करन दीवान और नर्गिस।

इस गाने की शुरुआत एक प्रभावी आवाज़ में इस डायलॉग से होती है: बहुत घूमी हैं हमने दिल्ली और इंदौर की गलियां। न भूली हैं और न भूलेंगी लाहौर की गलियां। 

ये डायलॉग अविभाजित भारत के हिंदू और सिक्खों की मनोदशा को अच्छे से बताता है। न चाहते हुए भी उन्हें अपनी जन्मभूमि को छोड़ना पड़ा और देश में अलग-अलग जगहों पर बसना पड़ा। और फिर वो अपने ही देश में जीवन भर शरणार्थी कहलाए। बेचारे अपने बचपन के शहर को याद करते-करते चले गए।🙏


बुजुर्ग ऐसा कहते थे  कि जिन्होंने लाहौर नहीं देखा उनका जन्म ही नहीं हुआ।  इंदौर की गलियों से ही फुर्सत नहीं मिलती हमें, दिल्ली/लाहौर क्यूं जाएं? क्या वो हमारे पारसी मोहल्ले से भी 'बड़े' हैं!? ऐं!!

लेकिन लाहौर फिल्म का ये  डायलॉग और  गाना सुनना और देखना तो बनता है! बुजुर्गों की बात मानी जाए, थोड़ा सा जन्मा जाए!

कोशिश तो बहुत की जानने की, कि ये डायलॉग किसकी आवाज में है। करन दीवान, श्याम सुंदर, फिल्म के निर्देशक एम एल आनंद या कोई और? 

बचपन में ये डायलॉग पिताजी, चाचाजी और मोहल्ले के अन्य अंकल लोगों के मुंह से काफी बार सुना था। तब ये नहीं मालूम था कि ये किसी फिल्म का डायलॉग भी है। अब ये सब तो बहुत पहले प्रभु शरण में जा चुके हैं।🙏🙏

फिलहाल हमें यू ट्यूब, गूगल और RMIM ग्रुप में ही शरण लेनी होगी इस बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए। कुछ और रोचक जानकारी मिलेगी तो यहीं एडिट करके साझा कर देंगे। बिल्कुल इसी जगह।

एक साल से कोशिश की जा रही थी कि किसी तरह इस गाने को साइकिल संगीत में फिट कर दिया जाए। काफी मंथन और चिंतन के बाद, अब साइकिल गीत के मानदंड (Criteria) भी बना दिये गए हैं जिसपर ये गीत खरा उतरता है! (इसलिए इस 22 वें साइकिल गीत को क्रमानुसार सूची में 3A नम्बर भी दिया गया है ताकि गानों का वर्षानुसार क्रम भी बना रहे।)

बचपन से इस गाने को रेडियो सीलोन और विविध भारती पर कई-कई बार सुना है। बड़े होकर शब्द समझ आने लगे तो गाना और प्रिय हो गया। और अब इस नर्गिसी  गीत को साइकिल संगीत में पोस्ट करने के बाद परम आनंद और आत्मिक संतोष प्राप्त हो रहा है।

ये सच है कि लगभग पूरा गाना जंगल रूपी बगीचे में फिल्माया गया है।  लेकिन दोनों अपनी-अपनी साइकिल से ही बगीचे में आते हैं और साइकिल से ही जाते हैं। गाने के अंत में करन दीवान और नर्गिस साइकिल पर जाते दिखाई देते हैं। उनका अंत में बाय करते हुए साइकिल से निकल जाना भी काफी रोमांटिक है।

नर्गिस के बारे में क्या बोलें, क्या लिखें! उनकी तस्वीर ही सब कुछ बयाँ कर देती है।

अगर फिल्म में गाना देखेंगे तो करण दीवान, नर्गिस और उनकी साइकिलें आपको अच्छे से दिखाई देंगी। दोस्तों, अब स्वीकार कर लीजिए  कि ये सिर्फ एक रोमांटिक नर्गिसी गीत ही नहीं, एक प्यारा सा साइकिल गीत भी है; भले ही ये आपकी साइकिल गीतों की सूची में ना हो!

  (करन दीवान और नर्गिस के  स्क्रीन शॉट्स 👇👆)



ये फिल्म विभाजन की भीषण त्रासदी के बीच पनपी प्रेम कहानी पर आधारित है। इस प्रेम कहानी का सर्वोतम युगल गीत शायद यही है। हमारे लिए आज का गीत लता के गाए इसी फिल्म के अमर गीत बहारें फिर भी आएंगी के समकक्ष ही है। 

फुर्सत और जिगरा चाहिए ऐसी फिल्में देखने के लिए! जानते हैं, आप में तो बिल्कुल नहीं है;) 

एक सीन के बारे में आपकी  बता देते हैं। फिल्म में नर्गिस का नाम लीलो है। हीरो करन दीवान का नाम है चमन जिनके भाई हैं ओमप्रकाश। ओमप्रकाश के पूरे बाल हैं, मोटापा भी नहीं है लेकिन आवाज़ और स्टाइल वही जानी पहचानी है।  लीलो और चमन के संदेश एक दूसरे तक पहुंचने  के लिए ओम प्रकाश सब्जी वाला बन जाते हैं। और आवाज़ लगाते हैं: आलू मटर लीलो, आलू मटर लीलो! लीलो आती हैं, सब्जी और संदेशा ले जाती हैं!

इस गीत के संगीतकार श्यामसुंदर के बारे में हम पहले भी रेल संगीत और साइकिल संगीत में चर्चा कर चुके हैं। उनकी आवाज़ समझने के लिए उनका एस डी बर्मन के संगीत में गाया ये गीत भी सुन लिया जाए: सर फोड़ फोड़ मर जाना। ( क्या आज के गीत का उपरोक्त डायलॉग श्यामसुंदर ने बोला होगा? शायद नहीं।)

श्यामसुंदर के संगीत में बना ये साइकिल गीत आप पहले ही सुन चुके हैं:  ए मोहब्बत उनसे मिलने ( बाजार 1949)।

आज के गाने, उस अनजाने लेकिन प्रभावी  डायलॉग (बहुत घूमी हैं हमने दिल्ली और इंदौर की गलियां...)  और लीलो वाले सीन के अलावा भी फिल्म में बहुत कुछ है, जैसे:  राजेंद्र कृष्ण के लिखे हुए उम्दा गाने, श्याम सुंदर का बेहतरीन  संगीत, लता और करन दीवान की बेमिसाल गायकी, नर्गिस और करन दीवान का जानदार अभिनय और फिल्म का सुंदर छायांकन। नर्गिस की साइकिल भी है।


फिल्में, गीत और संगीत कल्पना से ही बनते हैं। तो बस इस काल्पनिक, AI जनरेटेड फोटो से ही आज की बात पूरी कर लेते हैं, प्रभु!🙏🙏

आपके प्यार की दुनियां भी यूं ही जवाँ रहे!
     



पंकज खन्ना 
9424810575 


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