(18) उनसे रिप्पी टिप्पी हो गई।

पंकज खन्ना
9424810575

               
साइकिल संगीत की अगली/पिछली ब्लॉग पोस्ट्स: 
(1) साइकल संगीत-परिचय (3/6/2025)
(2) सावन के नज़ारे हैं। (खजांची 1941) 15/8
(3) ओ दूधवाली ग्वालनिया (सीधा रास्ता 1947) 23/8
(5) मेरे घुंघर वाले बाल ( परदेस 1950) 3/9
(7) ओ साइकिल वाले बाबू ( अजीब लड़की 1950) 17/1
(8) आया रे आया रे आया रे भाजीवाला। तूफ़ान और दिया (1956) 31/1
(10) सांवले सलोने दिन आए बहार के। एक ही रास्ता (1956)14/2
(11) बड़े भैया लाए हैं लंदन से छोरी। एक ही रास्ता (1956)18/2
(12) हमको हँसते देख ज़माना जलता है।हम सब चोर हैं। (1956) 21/2
(16) जवानियां ये मस्त मस्त। तुमसा  नहीं  देखा(1957) 21/3

आज का गाना: (18) उनसे रिप्पी टिप्पी हो गई। यानी बात पक्की हो गई। 


गीतउनसे रिप्पी टिप्पी हो गई। फिल्म:  आगरा रोड (1957) गायक: रफ़ी। गायिका: गीता दत्त। गीतकार: प्रेम धवन। संगीतकार: रोशन। पर्दे पर: शकीला, विजय आनंद। गाने के बोलफिल्म के सभी गाने


         ( विजय आनंद और शकीला)


B ग्रेड फिल्म के इस A प्लस ग्रेड  गाने को एक बार ज़रा सुन लीजिए तसल्ली से। आपकी इस गाने से 'रिप्पी टिप्पी' हो जाएगी। साइकिल संगीत से तो आपको पहले से ही है। हमसे तो रिप्पी टिप्पी रहने ही दो भिया। दोस्त रहो, दोस्ताना मत दिखाओ!

आप तो बस ये बताईए, ऐसे कातिल गीत भी अधिकांश लोगों ने क्यों नहीं सुन रखे हैं!? क्या नहीं है इस गीत में!? 

क्या बताऊं बाउजी, सब कुछ है इस गीत में: साइकिलें, साइकिल की घंटी, Whistling यानी गोल मुंह वाली सीटी, शकीला का ग्लैमर , विजय आनंद की स्टाइल, सहकलाकारों की मासूमियत, रफी और गीता दत्त की उम्दा गायकी, रफी की Yodelling, संगीतकार रोशन का प्यार भरा शरारती लेकिन उच्च कोटि का संगीत, प्रेम धवन के सादगी से भरे चंचल शब्द,  प्राकृतिक नज़ारे, खूबसूरत हरा भरा जंगली रास्ता, उसमें से जाती इंपोर्टेड बड़ी कार (Morris 10, 1936/37/38 made, Open Top Version ), साइकिल चलाते सीटी बजाते आशिक ( संभवतः सतीश व्यास),  कार के साथ झुंड बनाकर साइकिल चलाती आशिक की मित्र मंडली, गुजराती  और पंजाबी भाषा का तड़का और अजीब से शब्द 'रिप्पी टिप्पी'!  बस प्रसिद्धि नहीं है इस गीत में! 



इस गाने की एक बड़ी विशेषता है: योडलिंग (Yodelling) और वो भी रफी की! बस गाने के डिटेल्स हो जाएं फिर योडलिंग पर चर्चा करेंगे; रफी भक्तों और किशोर भक्तों को आपस में लड़ मरने का एक और बहाना दिया जाएगा! और हम संगीतभक्त, चप्पल उल्टी करके, बगैर टिकट मज़ा लेंगे!

ये साइकिल गीत होने के साथ-साथ एक सीटी गीत भी है। अभी तक हम चार सीटी वाले साइकिल गीतों पर चर्चा कर चुके हैं:


इस गाने में साइड हीरो को  साइकिल चलाते हुए और सीटी बजाते हुए देखा और सुना जा सकता है। हमारा तो ये कहना है कि अगर सीटी ही नहीं बजानी है तो  साइकिल चलाना ही क्यों!? 


इन सभी सीटी वाले गानों में सीटी किस कलाकार ने बजाई? कहीं कोई उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन सीटी बजी और खूब बजी। प्राचीन काल से लेकर आज तक बच्चों को साइकिल चलाना सिखा देते हैं और सीटी बजाना नहीं! कैसे जाहिल पेरेंट्स हैं;)

गाना ऐसा है कि हीरोइन शकीला इंपोर्टेड मॉरिस 10 चला रही हैं। उनके साथ बैठे हैं फिल्म के हीरो विजय आनंद। वो कार इतनी धीरे-धीरे चला रही हैं कि साइड हीरो और उनके दोस्त भी कार के साथ साइकिल चला पा रहे हैं। और पूरा ग्रुप मिलकर गाना गा रहा है: उनसे रिप्पी टिप्पी हो गई!

गाने की गुजराती लाइनों पर ध्यान लगाइए:

लड़की: माने तारे माटे हो जी प्रेम छे।
लड़का : हूँ शूं करूँ!?
लड़की: हो जी प्रेम केटली मीठी गेम छे!
लड़का: अरे पण हूँ शूं करूँ!?

लड़की को लाइन मारना पड़ रही है और लड़का 'हूँ शूं करूँ' किए जा रहा है! पगला!

अब गाने की पंजाबी लाइनों पर आ जाइए:


लड़का: बलिए नी पेंचर हो गया!
लड़की: मैं की कराँ!?
लड़का: सांनू तेरे नाल प्यार हो गया!
लड़की: मैं की कराँ!?

पुराने जमाने में यही होता था। लड़के लड़कियों पर लट्टू हुए जाते थे और लड़कियां कहती थीं तो मैं क्या करूं! बेचारे!

अब आज के बदलते जमाने में छोरा छोरी में फास्ट फॉरवर्ड में 'रिप्पी टिप्पी' हो जाती है। और फिर शुरू पप्पी, झप्पी। बुक हो जाता है Oyo रूम। मालूम पड़ने पर माँ बाप की सिट्टी पिट्टी गुम। पहले प्री वेडिंग के खर्चे फिर शादी टूटने के चर्चे। छप जाते हैं पर्चे। एक निकलता है हिंदी का गप्पी और दूसरा अंग्रेजी का Tippy (अस्थिर)। वहीं धरी रह जाती है रिप्पी टिप्पी! 

छोड़ते हैं ये सब सांसारिक बातें और समझते हैं Yodelling! संगीत की एक ऐसी विधा जो मन को प्रफुल्लित, आनंदित कर देती है। इस बारे में कभी बात तो करनी ही थी। अच्छा है साइकिल और संगीत के साथ Yodelling भी हो ही जाए!

Yodelling क्या होता है? इसे  समझने के लिए सन 1961 का फिल्म झुमरू का किशोर कुमार का गाया ये गीत सुन लीजिए: मैं हूं झुम झुम झुम झुम झुमरू। इस गाने के बीच में आवाज का  बहुत तेज उतार चढ़ाव जो  'यो-डेल-ए-ई-ओ' जैसी ध्वनि के रूप में उत्पन्न होता है, वही Yodelling है। इस गीत को अक्सर पहला Yodelling गीत मान लिया जाता है।

लेकिन आज का गीत 'झुमरू' गीत से भी चार साल पहले का है और इसमें Yodelling रफी ने की है। कुछ लोग ये मानते हैं कि इसी 'रिप्पी-टिप्पी' से रफी ने Yodelling की शुरुआत की।

लेकिन किशोर कुमार ने सन 1950 की एक कम प्रसिद्ध फिल्म मुकद्दर में इस गाने में yodelling की है: एक दो तीन चार बागों में आई बहार। अभी तक की जानकारी के अनुसार कह सकते हैं कि यही हिंदी फिल्मों का पहला Yodelling गीत है। इस गीत के अंत में आशा भोंसले ने भी किशोर कुमार के साथ मिलकर थोड़ी सी Yodelling की है। इस  ऐतिहासिक गीत के संगीतकार का नाम है: जेम्स सिंघ

पहले Yodelling का संक्षिप इतिहास जानकर, कुछ प्रमुख विदेशी और देशी Yodelling गीतों के लिंक नीचे लगा देते हैं। आप सुनते रहिए आपकी सुविधानुसार अगले हफ्ते तक। 

Yodelling मूल रूप से स्विस पहाड़ियों में चरवाहों द्वारा दूर से संवाद करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक थी, जिसकी शुरुआत चौथी-पांचवी सदी में हुई थी। और यह शैली स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और दक्षिणी जर्मनी के लोक संगीत का हिस्सा बन गई और कंट्री म्यूजिक में भी इस्तेमाल होती आ  रही है।

रिकॉर्डेड संगीत में Jimmy Rodgers ( 1893-1933) को Father of Yodelling माना जाता है। (कहते हैं, किशोर कुमार ने भी इनसे ही प्रेरणा ली थी।) सबसे पहली महिला yodelling सिंगर हैं : Pasty Montana


Franzl Lang (1930–2015) को  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Yodel King माना जाता है। उन्होंने Alpine yodelling की परंपरा को  आधुनिक युग में  जीवित रखा और आगे बढ़ाया।

विदेशी Yodelling गीतों में हमारा सबसे प्रिय गीत  Frank Field ने गाया है: She taught me how to yodel. इसी गीत को एक संगीत प्रतियोगिता में एक छोटी बच्ची ने भी बहुत अच्छा गाया है। इस बच्ची की आवाज़ में भी सुन सकते हैं: She taught me how to yodel.


अब अंत में  हम सबके प्यारे कुछ देशी Yodelling गीतों के लिंक लगा देते हैं:

(1) एक दो तीन चार बागों में आई बहार। फिल्म: मुकद्दर (1950)। गायक: किशोर कुमार।

(2) उनसे रिप्पी टिप्पी हो गई। फिल्म: आगरा रोड (1957)। गायक: रफी।

(3) मैं हूं झुम झुम झुम झुम झुमरू। फिल्म : झुमरू ( 1961)। गायक: किशोर कुमार।

(4) ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना। फिल्म:  अंदाज़ (1971)। गायक: किशोर कुमार।


जब कभी फिर मौका मिलेगा, Yodelling की बात को और आगे बढ़ाया जाएगा। कार्यवाही की जाएगी धीरे धीरे। कभी हम भी सरकारी अफसर थे!

ज़रा ध्यान लगाइए और सोचिए। आस पास सठियाए दोस्त बैठे हैं, किस्सागोई चल रही है। किस्सागो दास्तां  सुनाते सुनाते एकाएक आंख मार देता है! किस्सा वही रहता है लेकिन दास्तां हसीन, खुशनुमा और यादगार हो जाती है।

बस यही Yodelling में होता है। संगीत बज रहा है, गाना गाया जा रहा है। यकायक yodelling आ जाती है। बस यही है Musical Wink यानी संगीत का आंख मारना! फिर गाना और हसीन, खुशनुमा, यादगार हो जाता है।

तो बस साइकिल चलाते रहिए। घंटी, सीटी बजाते रहिए। Musical Wink समझते रहिए और  करते रहिए संगीत से रिप्पी टिप्पी!


पंकज खन्ना 
9424810575


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अंग्रेजी में:

Love Thy Numbers : गणित में रुचि रखने वालों के लिए।
Love Thy Squares: Magic Squares के बारे में।
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CAT-a-LOG: CAT-IIM कोचिंग।छात्र और पालक सभी पढ़ें।
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