साइकिल संगीत की अगली/पिछली ब्लॉग पोस्ट्स:
(1) साइकल संगीत-
परिचय (3/6/2025)
गीत: बोल बोल बोल सच सच बोल। फिल्म: लक्ष्मी(1957)। गायक: रफ़ी। गीतकार: क़मर जलालाबादी।संगीतकार: अविनाश व्यास। पर्दे पर: मारुति और अन्य साइकिल सवार। गाने के बोल। फिल्म के सभी गाने। हास्य कलाकार मारुति का वीडियो परिचय। मारुति पर फिल्माया गया एक रेल गीत।
आज का ये साइकिल गीत स्टेज पर फिल्माया गया है। इसके पहले आप स्टेज पर फिल्माए गए दो साइकिल गीतों पर ब्लॉग पोस्ट्स पढ़ चुके हैं: (4) ए मोहब्बत उनसे मिलने और (6) एक दिन लाहौर की ठंडी।
स्टेज से पर्दा उठता है और ढेर सारे फैशनेबल लड़के-लड़कियां हाथ पैर पटकते, और उछलते-कूदते, नाचते-गाते दिखाई देते हैं। और फिर फिल्म के हास्य कलाकार मारुति की एंट्री साइकिल चलाते हुए होती है। मारुति ने चश्मा पहना हुआ है और सीटी भी बजा रहे हैं। उस जमाने के हिसाब से काफी फास्ट रॉक एंड रोल गीत है।
(संगीतकार अविनाश व्यास)
मजे की बात ये है कि इस पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित गीत का संगीत तैयार किया है संगीतकार अविनाश व्यास ने जिन्होंने भारतीय संगीत के एक से बढ़कर एक गीत बनाए हैं जैसे तूने खूब रचा भगवान खिलौना माटी का; जिसे WhatsApp आदि के खुलते ही बजाना अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए;)
तो इस रॉक एंड रोल वाले साइकिल गीत में मारुति दुनिया की पोल खोल रहे हैं। दूध वाला, हलवाई, डॉक्टर, बणिया, माशूक, दोस्त, वकील और सुनार आदि किसी को नहीं छोड़ा; सबकी पोल खोल रहे हैं, बस पुलिस और नेताजी को छोड़कर!
सब कुछ हम ही बता दें!? थोड़ा प्रयत्न आप भी कीजिए , खुद देखिए ये संगीतमय पोल खोल!
आज का साइकिल गीत एक सीटी गीत या Whistling Song भी है। अभी तक हम पांच सीटी वाले साइकिल गीतों पर चर्चा कर चुके हैं:
तेरहवें ब्लॉग पोस्ट (
चले बजाते सीटी, जीवन की राहों में) में गानों में Whistling यानी सीटी के बारे में थोड़ी बातें की गई हैं। अगर सीटीबाजी का शौक रखते हैं तो जरूर पढ़िए इस 'तेरहवीं पोस्ट' को। चिंता ना करें; ब्लॉग की 'तेरहवीं' का टाइम अभी नहीं आया है! अभी तो आपको बहुत पकाना बाकी है!कुछ Trolls की छाती पर मूंग भी दलनी है;)
संगीत में गायकों और विभिन्न वाद्य वादकों को काफी नाम और दाम मिला। लेकिन गानों में सीटीबाजों को सन 1975 के पहले तक कभी नाम भी नहीं मिला। सीटीबाजी को हमेशा एक निम्न दर्जे की कला समझा गया, जबकि सीटीबाजी भगवान द्वारा मनुष्य को प्रदत्त एक उत्तम उपहार है। हम अहंकारी मनुष्य अपने ही वाद्य यंत्र बना बना कर खुश हो जाते हैं। और सीटीबाजी बिल्कुल नहीं करते हैं। सोचो जरा, लड़कियों को कितना बुरा लगता होगा!
अब तो गली मोहल्ले के टपोरी भी सिनेमा हाल या गलियों में सीटी नहीं बजाते हैं। घोर कलयुग है!
सन 1975 के पहले तक, इन सभी Whistling Songs में कोई विशिष्ट 'सीटीबाज' नहीं होते थे। गायक, गायिकाएं, सहायक संगीतकार या संगीतकार स्वयं ही गानों में आवश्यकता अनुसार सीटी बजा दिया करते थे।
सन 1975 के बाद नागेश सुर्वे उभर कर आए और उन्होंने सैकड़ों गानों में whistling की। बाद के साइकिल गीतों में इनके बारे में बातें करेंगे। लेकिन अभी तो पचास के दशक में ही साइकिल चल रही है। टाइम लगेगा।
मेरी उमर के रिटायर्ड दोस्तों, कुकर की तीन सीटियों में ही मत उलझे रहिए! घर से बाहर निकलिए। साइकिल चलाइए, सीटी बजाइए! यही सही उम्र है सीटी बजाने की! कोई आपकी सीटी का बुरा भी नहीं मानेगा आपका बिकट बुढ़ापा देखकर!
पंकज खन्ना
9424810575
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हिन्दी में:
तवा संगीत : ग्रामोफोन का संगीत और कुछ किस्सागोई।
रेल संगीत: रेल और रेल पर बने हिंदी गानों के बारे में।
कुछ भी: विभिन्न विषयों पर लेख।
तवा भाजी: वन्य भाजियों को बनाने की विधियां!
अंग्रेजी में:
Epeolatry: अंग्रेजी भाषा में रुचि रखने वालों के लिए।
CAT-a-LOG: CAT-IIM कोचिंग।छात्र और पालक सभी पढ़ें।
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