(24) / 2(B): नैनों के तीर चला गई एक शहर की लौंडिया!


गीत: नैनों के तीर चला गईफिल्म : शुक्रिया(1944)। गायक: सुंदर। गीतकार: गुलाम अहमद चिश्ती। संगीतकार: गुलाम अहमद चिश्ती। पर्दे पर: सुंदर और रमोला।

गीतकार और संगीतकार गुलाम अहमद चिश्ती ने सन 1944 में फिल्म शुक्रिया में एक विवादास्पद गीत दिया था जिसके बोल थे: एक शहर की लौंडिया। इस गाने को  फिल्म के हीरो सुंदर सिंघ ने  बेवडे के रूप में हिचकियाँ मार मार के खूब सुंदर गाया: स्टेज पर भी और साइकिल पर भी। सुंदर सिंघ या सिर्फ सुंदर के बारे में हम पिछले ब्लॉग पोस्ट में भी चर्चा कर चुके हैं।

इस गीत पर  तब के पंजाब सेंसर बोर्ड ने प्रतिबंध लगा दिया था। लिहाजा ये गीत बहुत अधिक प्रसिद्ध हो गया और पूरे भारत में बहुत सुना गया! क्योंकि ये बैन हो गया था इसलिए आप भी जरूर सुनेंगे!(एक शहर की लौंडिया)।

गाने के बोल नीचे लिखे हैं।

नैनों के तीर चला गई।2
एक शहर की लौंडिया।
शहर की लौंडिया।3
दिल पे निशाना लगा गई।2
एक शहर की लौंडिया।
शहर की लौंडिया।
नैनों के तीर चला गई।
रेशम की साडी थी, चेहरा गुलाब था।2
हाय मेरी मैय्या।3
(ग़ज़ब का शबाब था।हाय मेरी मैय्या)2
इश्क का रोग लगा गई।2
एक शहर की  लौंडिया।
शहर की लौंडिया।
नैनों के तीर चला गई।
गोरा गोरा रंग।3
और थोड़ा थोड़ा लाल था।
आशिकों के फांसने को ज़ुल्फ़ों का जाल था।2
करके इशारा बुला गई।2
एक शहर की लौंडिया।
शहर की लौंडिया
नैनों के तीर चला गई।
पैरों तले उसके आँखें बिछाऊंगा।2
सौ बार रूठे तो एक बार
नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं!
एक बार रूठे तो सौ बार मनाऊंगा।2
गर वो मेरे हाथ आ गई।2
एक शहर की लौंडिया।
शहर की लौंडिया।
नैनों के तीर, नैनों के तीर
हाँ नैनों के तीर चला गई।

अब ये गीत साइकिल गीत क्यों हो गया!? क्योंकि इसमें हीरो को साइकिल चलाते हुए दिखाया गया है। बहुत ढूंढने के बाद भी बस कुछ ही सेकेंडो का ये वीडियो मिला है। वीडियो की क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं है। लेकिन वीडियो के अंत में चलती साइकिल जरूर दिख जाएगी!

लौंडिया जैसे शब्दों का चयन आज भी मुश्किल काम है। तो उस जमाने के हिसाब से ये काफी 'मॉडर्न' गीत था। सुंदर एक अच्छे हास्य कलाकार थे, सभी जानते हैं। गाने के उनके अपने  अंदाज  से भी वो लोगों को हँसा सकते हैं; ये आज के साइकिल गीत से मालूम पड़ता है। गाने में उनका आहें भरना और हाय मेरी मैया बोलना बहुत मनोरंजक है! सुनिए तो!(एक शहर की लौंडिया)

आज शहर की लौंडिया और गांव की गोरियां सब बराबर हो गई हैं। सावधान रहना देश के नौजवानों:  हवा में नैनों के तीर आज भी उड़ रहे हैं, कुछ ज्यादा ही उड़ रहे हैं और चहुँ ओर उड़ रहे हैं। शहरों से भी और गांवों से भी। हाय मेरी मैया, हाय मेरी मैया!


पंकज खन्ना 
9424810575 


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