गाने के बोल:
ऐ मोहब्बत उनसे मिलने,
ऐ मोहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया।
तुमने देखा हमने देखा, तुमने देखा हमने देखा
इक फसाना बन गया।
ऐ मोहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया।
आपकी नीची नज़र के तीर कैसे हैं
आपकी नीची नज़र के तीर कैसे हैं
तीर चलने भी ना पाये
तीर चलने भी ना पाये दिल निशाना बन गया।
ऐ मोहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया।
दिल ने पहली ही नज़र में कर लिया कुछ फैसला
दिल ने पहली ही नज़र में कर लिया कुछ फैसला।
साज़ छेड़ा भी नहीं और
साज़ छेड़ा भी नहीं और इक तराना बन गया।
ऐ मोहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया।
नज़रें मिल भी ना पाईं तुम नज़र में आ बसे
नज़रें मिल भी ना पाईंतुम नज़र में आ बसे
तिनके ढूंढे भी नहीं और
तिनके ढूंढे भी नहीं और आशियाँ बन गया
ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया।
ये गीत इस फिल्म में एक स्टेज शो में दिखाया गया है। निगार सुल्ताना लेडीज़ साइकिल चलाते हुए स्टेज पर आती हैं। उन्होंने काला चश्मा पहन रखा है। पार्श्व में ये मधुर गीत बजना शुरू हो जाता है। स्टेज पर आते ही उनका बैलेंस बिगड़ जाता है, किताब गिर जाती है। लेकिन साइकिल और उनका गॉगल नहीं गिरता है! हीरो श्याम मौके को भुनाने पहुंच जाते हैं। किताबें उठाकर निगार सुल्ताना ( मुगले आजम की अदाकारा बहार) को दे देते हैं।
फिल्मों में किताबें गिरना, किताबें उठाना, प्रेम हो जाना और फिर प्रेम से गाने गाना संभवतः इसी गाने से प्रारंभ हुआ है। बोल फिल्मेरिया महाराज की जय!
गाने में जरा देखिए तो कैसे दोनों बैठकर साइकिल की फ्रेम के अंदर से एक दूसरे को निहारते हुए प्रेम में डूबे हुए हुए गा रहे हैं। जैसे साइकिल की सीट ना हुई, माइक हो गया हो!
श्याम बाबू अपनी किस्मत से बहुत खुश हैं और मुहब्बत को धन्यवाद दे रहे हैं: ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया।
इस गीत की कुछ लाइनें बहुत गजब की हैं! जवानी याद दिला देती हैं!
-तुमने देखा हमने देखा, इक फसाना बन गया! ----तीर चलने भी ना पाये दिल निशाना बन गया। -साज़ छेड़ा भी नहीं और इक तराना बन गया। -नज़रें मिल भी ना पाईं तुम नज़र में आ बसे। -तिनके ढूंढे भी नहीं और आशियाँ बन गया।
गजब मोहब्बत है ये तो! इधर सोचा और उधर हो गई!
थोड़ी सी बात अब निगार सुल्ताना की फिल्म बाजार के दो रेल गीतों की भी कर ली जाए।
इन दो रेल गीतों का जिक्र रेल संगीत के दो ब्लॉग्स में किया जा चुका है। इन दोनों ब्लॉग पोस्ट में इस फिल्म और फिल्म के कलाकारों जैसे कमर जलालाबादी, श्याम, श्याम सुंदर , कुक्कू और निगार सुल्ताना के बारे में पहले भी चर्चा की जा चुकी है। दोनों ब्लॉगपोस्ट के लिंक नीचे दिए हैं:
अपनी नज़र से दूर वो ।
हीरो श्याम खिड़की पर बैठकर निगार सुलताना को याद कर रहे हैं और निगार सुल्ताना घर में रो रही हैं। गायक: मोहम्मद रफी। गायिका: लता मंगेशकर।
ज़रा सुन लो हम अपने प्यार का ।
निगार सुलताना, कुक्कू और साथी महिलाओं द्वारा गाई गई बेहतरीन कव्वाली। गायिका: राजकुमारी, लता मंगेशकर और साथी। परदे पर: निगार सुलताना, कुक्कू और साथी ।
कुछ दोस्तों से ऐसे ही पूछा कि मोहब्बत और साइकिल में क्या समानता है? बोले सठिया गया है क्या!? क्या बताएं, सठिया तो तीन साल पहले ही गए थे। लेकिन प्रश्न का जवाब साफ है: मोहब्बत और साइकिल दोनों में गिरने का खतरा बराबर बना रहता है! साइक्लिंग और मोहब्बत में और भी कई समानताएं हैं।
मोहब्बत में भी 'पैडलिंग' करनी पड़ती है। अगर आज के छोरे रोज़ फूल न दें, तारीफ़ न करें, खर्चा न करें तो रिश्ता भी उसी तरह रुक जाएगा जैसे बिना पैडल मारे साइकिल! और अगर बहुत ज़ोर से पैडलिंग की तो इंदौरी लड़की बोलेगी ही बोलेगी : ज्यादा तेज़ चल रिया हे क्या!?
साइकिल और मोहब्बत दोनों में संतुलन या बैलेंस ज़रूरी है। न झुके तो साइकिल/माशूका खफा! दोनों आगे ही नहीं बढ़ेंगी! और अगर ज्यादा झुक गए तो साइकिल का गिरना और उनका दमकना तय है!
मोहब्बत हो या साइकिलिंग, सेफ्टी के लिए ब्रेक तो लगाना ही पड़ता है। सड़क पर दाएं बाएं, आगे पीछे कोई बड़ी गाड़ी आ गई तो साइकिल को ब्रेक लगाना ही ठीक है। वरना दे दो हिसाब चित्रगुप्त को!
उसी प्रकार से आगे कभी लड़की का भाई सामने दिख जाए, या उसके पिताजी खिड़की से झांकते मिल जाएं, तो मोहब्बत को तुरंत ब्रेक लगाना पड़ता है! वरना भरो अस्पताल का बिल!
साइकिल की घंटी का मधुर संगीत ही दिल का संगीत है।साइकिल की घंटी की ट्रिन-ट्रिन और दिल की धड़कन की टक-टक दोनों में बड़ा साम्य है।
मोहब्बत और साइकिल, दोनों चलती तो बड़ी प्यारी हैं; पर शर्त यह है कि पैडल बराबर चलाओ, संतुलन बनाए रखो, और घंटी बजाना कभी मत भूलो!
बाकी सब छोड़ो, आप तो बस एक बार फिर से निगार सुलताना को लता मंगेशकर की आवाज में गाते देख लो, सुन लो! दिल के तार जरूर बजेंगे!
जवान साथियों तुम तो साइकिल भी चलाओ और इश्क भी लड़ाओ। तुम्हारा जमाना है। बाकी बुजुर्ग लोगों से में निपटता हूं;)
मेरे उमर के 'काले' बालों वाले मित्रों, समझो जरा! मोहब्बत करने लायक तो बचे नहीं हो, कितने भी बाल रंग लो। मोहब्बत गई तेल लेने! गाना तो देख सुन लिया, अब थोड़ी साइकिल ही चला लो हमारे साथ, मज़ा आ जाएगा। सेहत भी थोड़ी ठीक हो जाए शायद। तो आ रहे हो ना शनिवार को सुबह रालामंडल पर!?
आपकी साइकिलों की घंटी बजती रहे, दिल की धड़कन का संगीत भी बजता रहे। बस प्रभु से यही प्रार्थना है।🙏💐🙏
पंकज खन्ना
9424810575
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