(16) जवानियां ये मस्त मस्त (1957)

पंकज खन्ना
9424810575

               
साइकिल संगीत की अगली/पिछली ब्लॉग पोस्ट्स: 
(1) साइकल संगीत-परिचय (3/6/2025)
(2) सावन के नज़ारे हैं। (खजांची 1941) 15/8
(3) ओ दूधवाली ग्वालनिया (सीधा रास्ता 1947) 23/8
(5) मेरे घुंघर वाले बाल ( परदेस 1950) 3/9
(7) ओ साइकिल वाले बाबू ( अजीब लड़की 1950) 17/1
(8) आया रे आया रे आया रे भाजीवाला। तूफ़ान और दिया (1956) 31/1
(10) सांवले सलोने दिन आए बहार के। एक ही रास्ता (1956)14/2
(11) बड़े भैया लाए हैं लंदन से छोरी। एक ही रास्ता (1956)18/2
(12) हमको हँसते देख ज़माना जलता है।हम सब चोर हैं। (1956) 21/2


गानाजवानियां ये मस्त मस्त। फिल्म: तुमसा  नहीं  देखा(1957)। गायक: रफी। गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी। संगीतकार : ओ पी नैय्यर। पर्दे पर: शम्मी कपूर, अमिता और अन्य साथी कलाकार। गाने के बोलफिल्म के सभी गाने



आप छोरे की जात के हो या छोरी की जात के; आज का गीत सुनकर आपका मन भी साइकिल की  घंटी की तरह बज उठेगा: टिरिन, टिरिन! टिरिन, टिरिन!!

लेडीज़ फर्स्ट! आज के गीत में सन 1957 की कुछ फैशनेबल महिलाओं को पिकनिक पर मौज मस्ती करते हुए दिखाया गया है। वो साड़ी ना पहनकर वेस्टर्न ड्रेसेस में दिख रही हैं। कुछ ने काले चश्मे लगाए हुए हैं। शहर से बहुत दूर कभी ओपन जीप में सवार हैं, कभी साइकिल चला रही हैं, कभी बगीचे में चटाई बिछाकर पोर्टेबल ग्रामोफोन सुन रही हैं, कभी ग्रुप फोटो खिंचवा रही हैं, कभी रंगबिरंगी छतरी तले जलवे और अदाएं बिखेर रही हैं, कभी नृत्य में लीन हैं और कभी लंगड़ी , फुगड़ी खेल रही हैं। मतलब फुलटुश मस्ती, दिलकश नज़ारे एक ही गाने में! ये सब देखकर शम्मी कपूर गाने को स्वतः मजबूर हो जाते हैं: जवानियां ये मस्त मस्त

आप समझ लीजिए कि बस इसी फिल्म और इसी गाने से शम्मी कपूर,  शम्मी कपूर बने थे।

 ( आज के गाने के स्क्रीनशॉट्स का कोलाज)

     (गाने की साइक्लिंग के स्क्रीन शॉट)

सन 1941 से 1957 तक के जितने भी साइकिल गीत इस ब्लॉग सीरीज़ में अब तक कवर किए गए हैं उनमें सबसे प्रसिद्ध और जाना पहचाना यही गीत है। आखिर इस गीत में ओ पी नैय्यर का शाश्वत संगीत, मजरूह के शब्द, रफी की आवाज़ और शम्मी कपूर का जानदार अभिनय जो है। इन चारों कलाकारों  पर भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किए हैं। रफी और मजरूह के डाक टिकट आपको पहले ही दिखा चुके हैं।

कहते हैं, देव आनंद ने फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' को ठुकरा दिया था। उनका इस फिल्म को ठुकराना शम्मी कपूर के लिए वरदान सिद्ध हुआ। इसके बाद उन्होंने इस नए अवतार में एक के बाद एक  कई हिट फिल्में दीं। 

बाद में शम्मी कपूर ने फिल्म 'जब प्यार किसी से होता है' करने से मना कर दिया तो ये फिल्म देव आनंद को मिल गई! और ये फिल्म भी एक हिट साबित हुई। हिसाब बराबर! यही विधि का विधान, संविधान है, समाधान है।

अभिनेत्री अमिता को आप पहले भी साइकिल गीत चले बजाते सीटी, जीवन की राहों में में देख चुके हैं।अमिता सुंदर थीं और प्रतिभावान भी।  उन्होंने  ‘देख कबीरा रोया’, ‘गूंज उठी शहनाई’ और ‘सावन’ में  बहुत अच्छे लीड रोल किए थे। शम्मी कपूर ने अमिता को हो देखकर ये गीत इसी फिल्म में गाया है: यूं तो हमने लाख हंसी देखे हैं पर तुमसा नहीं देखा। शम्मी कपूर तो इस फिल्म के बाद हमेशा के लिए हिट हो गए लेकिन अमिता जल्दी ही  फिल्मों से दूर हो गईं। पर उनके लिए हमेशा यही कहा जाएगा: तुमसा नहीं देखा!

आज के गाने में दिखाई गई मस्ती महिलाओं के लिए इतनी आसान और सुलभ नहीं रही है। इन्हें इस मस्ती के करीब पहुंचाने में साइकिल का बहुत योगदान रहा है। कैसे!? बताता हूं भिया, बताता हूं!

यूरोप और अमेरिका में 1890 के दशक में नई Safety Bicycle (दो बराबर पहियों वाली) और Pneumatic Tyres आने के बाद सभी के लिए साइकिल चलाना आसान हो गया। पहली बार महिलाएँ भी साइकिल चलाने का सोचने लगीं। और फिर धीरे से चलाने भी लगीं।

ग्रामोफोन, यानी तवा संगीत के आराध्य कुलदेव, और आधुनिक साइकिल लगभग एक साथ ही अवतरित हुए थे 1890 के दशक में।

साइकिल आने के पहले के दौर में महिलाओं की स्वतंत्रता बहुत सीमित थी। जैसे अकेले दूर जाना मुश्किल, हर काम में पुरुष पर निर्भरता और सार्वजनिक जीवन में कम भागीदारी। लेकिन साइकिल ने यह सब बदल दिया।

अब महिलाएँ खुद बाज़ार या मित्रों से मिलने जा सकती थीं और शहर के बाहर भी  घूम सकती थीं। अचानक उन्हें व्यक्तिगत गतिशीलता (Mobility) मिल गई। साइक्लिंग के साथ उनके कपड़े भी हल्के, आरामदायक, पसंद के और फैशनेबल होते गए।

प्रसिद्ध अमेरिकी महिला अधिकार कार्यकर्ता Susan B. Anthony ने 1896 में कहा: “The bicycle has done more to emancipate women than anything else in the world.” 

उनका कहने का  आशय यही था कि साइकिल ने महिलाओं को आत्मविश्वास, स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्थानों में भागीदारी की सुविधा दी। जो काम Industrial Revolution और प्रिय Steam Engine महिलाओं के लिए नहीं कर पाए वो इस  छोटी सी साइकिल ने कर दिखाए।

साइकिल चलाने वाली महिलाओं को देखकर समाज में उनकी एक नई छवि भी बनी: सक्रिय, आत्मनिर्भर और निडर।

( सन 1896 में जारी किया गया Dayton Cycle का Advertisement.)

ग्रामोफोन के लोगो में कुत्ता ग्रामोफोन के भोंपू को निहारता रहता है। Dayton Cycle के कुत्ते को साइकिल के पीछे भागता दिखाया गया। दोनों कुछ ज्यादा तेज चल दिए और जल्दी ही लुप्त हो गए। धीरे-धीरे चलते तो शायद बने रहते! 

(Wright Brothers की भी  Dayton  में ही एक साइकिल कंपनी थी। और वो साइकिल के सिद्धांत समझकर सीधे हवाई जहाज बनाने लग गए। उनके बारे में शीघ्र ही बहुत बातें होगी। साइकिल संगीत के बाद अगला प्रोजेक्ट यही होगा: उड़ान संगीत! साथ में उड़ेंगे, धीरे से! कुछ ऐसे!!👇

उड़ेंगे कुछ हफ्ते बाद। अभी तो सिर्फ साइकिल ! चलती साइकिल संतुलित रहती है, खड़ी साइकिल गिर जाती है। बस जीवन भी वैसा ही है: रुके तो गए! तेज भागे तो भी गए!

पैदल चलते रहिए, साइकिल चलाते रहिए। दुनिया देखिए, संगीत  सुनिए: तवा संगीतरेल संगीत, और साइकल संगीत भी!  संतुलन बनाए रखिए, साइकिल पर भी और जीवन में भी;धीरे-धीरे

कबीर जो कह गए हैं: 

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। 

माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।🙏🙏



पंकज खन्ना 
9424810575

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हिन्दी में:

तवा संगीत : ग्रामोफोन का संगीत और कुछ किस्सागोई।
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अंग्रेजी में:

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