(7) ओ साइकिल वाले बाबू!🚲🎶🎺
गीत: ओ साइकिल वाले बाबू। फिल्म: अजीब लड़की(1952)। गायक: जी एम दुर्रानी। गायिका: शमशाद बेगम। गीतकार: शकील बदायुनी। संगीतकार: गुलाम मोहम्मद। पर्दे पर कौन है !? श्याम कुमार या रहमान और नसीम बानो या कुक्कू,पता नहीं। क्योंकि इस गीत का सिर्फ ऑडियो उपलब्ध है।
फिल्म की कहानी क्या रही होगी!? बस गैस ही कर सकते हैं। लेकिन फिल्म के ये दस गाने जरूर गवाही देते हें कि फ़िल्म की नायिका "अजीब लड़की" परंपराओं के साँचे में ढलने से इंकार करती है। वो सोचती है, चुनती है, और टकराती है।समाज से ये प्रश्न करती भी दिखाई देती है: क्या लड़की का अपनी ज़िंदगी पर हक़ होना “अजीब” है?
1950 के दशक के भारत में लड़की का पढ़ना, अपने लिए फ़ैसले करना, प्रेम में खुलकर बोलना, शादी को लेकर सवाल उठाना समाज को पसंद नहीं आता था। और ऐसी लड़कियां समाज को आज भी “अजीब” लगती हैं।
समाज ऐसी लड़कियों को “बिगड़ी हुई” करार देता है और इनके आत्म विश्वास तथा आत्मसम्मान से डरता है। असल में समाज अजीब है, लड़की नहीं!
गाने के पिक्चराइजेशन या वीडियो की बस कल्पना ही कर सकते हैं गाने के शब्दों से:
ओ साइकिल वाले बाबू हो बाबू। ओ साइकिल वाले साइकिल का पहिया रोक दे। ओ साइकिल वाले बाबू ओ जी बाबू।ओ साइकिल वाले साइकिल का पहिया रोक दे।
मेरी घंटी बाजे टन टन।मेरी पायल बाजे छन छन।-3
दोनों की मधुर झंकार कहे। करें प्यार। फ़ंस गई दिल हार। तेरे नैनों में है जादू। साइकिल का साइकिल का पहिया रोक दे।
चले सड़क पर मेरी गाड़ी। उल्टी सीधी तिरछी आड़ी। ना देखे कोई कंकर पत्थर।ना देखे कोई खाड़ी।
जैसे पवन पियर का मेल।जैसे कलकत्ते की मेल। पम पम पम पम।
हो गोरी तू भी होश संभाल। देखा तेरा मेरा प्यार। करेंगे बातें लच्छेदार।
रस्ते में बिगड़ ना जाये। तेरा दो पहियों का घोड़ा। लम्बी है डगर दिन थोड़ा। है रूप के लाखों डाकू। साइकिल का साइकिल का पहिया रोक दे।
इनकी क्या बात है गोरी। देख मिला कर नैन। पैदल है अरमान मचले। और मिला कर नैन चलेंगे। लखनऊ से उज्जैन चलेंगे। लखनऊ से उज्जैन।
मुझको मेरे घर पहुंचा दे। ओ हवा में उड़ने वाले। घिर आये हैं बादल काले। अब दिल पे रहा ना काबू। साइकिल का साइकिल का पहिया रोक दे। ना रोक चला जा बाबू।साइकिल का पहिया रोक दे। तेरे नैनों में है जादू। साइकिल का पहिया रोक दे।साइकिल का पहिया रोक दे।
( गाने के कुछ शब्द इधर उधर हो सकते हैं। सुनकर लिखने की कोशिश की है। भूल चूक लेनी देनी।🙏🙏)
साइकिल संगीत के पांचवी पोस्ट में हम कुक्कू, शकील बदायूंनी, शमशाद बेगम और गुलाम मोहम्मद का कमाल देख चुके हैं: मेरे घुंघर वाले बाल।
और आज के गीत में भी इन्हीं महारथियों का कमाल है। बस इतना नहीं मालूम कि ये गीत नसीम बानो पर फिल्माया गया है या कुक्कू पर।
सच में ये बड़ा दुर्भाग्य है कि इस प्यारे से साइकिल गीत का वीडियो नेट पर उपलब्ध नहीं है। हीरो हीरोइन को प्यार से साइकिल पर आगे या पीछे बैठाकर लखनऊ से उज्जैन ले जाने की इच्छा और हौसला रखता है। और हीरोइन कहती जाती है: साइकिल का पहिया रोक दे! लेकिन चाहती तो यही है कि उनकी साइकिल मतलब यात्रा चलती रहे!
इनकी प्यार भरी संगीतमयी बातें सुनिए तो सही। सौभाग्य से गाने का ऑडियो तो यूट्यूब पर उपलब्ध है।
“ओ साइकिल वाले बाबू” — सिर्फ़ गीत नहीं, एक चलती-फिरती प्रेम-कहानी है।यह गीत भोला-भाला और थोड़ा सा शरारती भी है। यह महज़ एक साइकिल को रोकने की गुहार नहीं, बल्कि समय को थाम लेने की प्रार्थना भी है।
हीरोइन जब ये कहती है: साइकिल का पहिया रोक दे, तब शायद उसका आशय है: ज़िंदगी, थोड़ा रुक जा। (इंदौरी स्टाइल में: "रुक, ज्यादा तेज मति चले!")
हीरो के साइकिल की घंटी: 'मेरी घंटी बाजे टन-टन' और हीरोइन की पायल : 'मेरी पायल बाजे छन-छन'। यानी मशीन की आवाज़ और मन की धड़कन की प्यारी सी जुगलबंदी है। यह ध्वनि या शोर नहीं है। संगीत है, प्यार की भाषा है। असली रोमांस है। आप साइकिल चलाओ तो जानो!
“उल्टी सीधी तिरछी आड़ी, ना देखे कोई कंकर पत्थर”। यह पंक्तियाँ साइकिल और इश्क़ दोनों की यात्रा के बारे में हैं। प्यार में आदमी ना खड्डा देखता है ना पत्थर, बस देखता है सामने वाला चेहरा। कंकर, पत्थर, खड्डे तो शादी शुदा लोगों को दिखते हैं!
'तेरा दो पहियों का घोड़ा'! घोड़ा और कार अमीरों की होती हैं। लेकिन यह प्रेम गरीब की साइकिल पर सवार है। सही है, प्यार के लिए पेट्रोल नहीं, दिल चाहिए।
क्योंकि अजीब लड़की का "दिल पर रहा न काबू" इसलिए उसे समाज, समय, परिवार —सब काले बादलों की तरह मंडराते दिखते हैं। 'अजीब लड़की' भी डर जाती है। इसलिए फिर वही पुकार: साइकिल का पहिया रोक दे!
अंत में अजीब लड़की फिर कहती है: तेरे नैनों में है जादू! सच में जादू न साइकिल में है, न सड़क में। जादू है उस नज़र में जो किसी को अपना बना ले। (आपकी नजर में वो जादू है, भौजी बता रही थीं! हंसते हुए!)
"अजीब लड़की” कौन है? यह “अजीब लड़की” कोई पागल या विचित्र नहीं है।बस वो अपने समय से आगे की सोच रखने वाली लड़की है। अपने घर की और आसपास की "अजीब लड़कियों" को समझने की कोशिश करें। (आप समझ गए : इन्हें अब प्यार से पापा की परी कहा जाता है!)
(इसी फिल्म में शमशाद बेगम ने एक और उम्दा गीत गाया है: मैं बनूंगी फिल्म स्टार! इस गाने के इस अंतरे को ध्यान से पढ़िए और फिर पूरा गाना सुनिए: "कोई न देखेगा फिर 'सरगम', 'बाबुल' और 'पुकार'। मुझसे 'नसीम', 'सुरैया', 'नरगिस' रहेंगी कोसों दूर। मेरे दर्शन को तरसेगा हरदम राज कपूर। मेरी शोहरत पे फिसलेगा दिल में दिलीप कुमार।" गाने की बोल पढ़ने के लिए ये लिंक देखें।)
हमें तो फिल्म स्टार नहीं बनना है। औकात पर यानि साइकिल पर लौट आते हैं।
पैंतालीस सालों से दोस्तों से सुन रहा हूं: साइकिल का पहिया रोक दे। ये भी बत्तीस सालों से बोल रही हैं: रुक जा इकत्तीसी टूट जाएगी! (एक पहले का टूटा हुआ है!)
अब तो परिजनों और दोस्तों को बोलने के लिए दो बड़े-बड़े कारण मिल गए हैं: AQI और ट्रैफिक। हमारा जवाब यही होता है इनसे बच गए तो अमर हो जाएंगे क्या!? नहीं ना!? तो साइकिल चलने दो ना!
साइकिल का पहिया अभी तो नही रूकने वाला। आपको सौ से अधिक साइकिल गीत क्रमानुसार जो बताने और सुनाने हैं। बस प्रभु का आशीर्वाद बना रहे। 🙏
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