(28) हसीनों संभालो (1958) खोटा पैसा
पंकज खन्ना
9424810575
आज का गाना: (28) हसीनों संभालो अपनी ये दुनिया, हम तो चले वीरानों में।
गीत: हसीनों संभालो अपनी ये दुनिया। फिल्म: खोटा पैसा(1958)। गायक: रफी। गीतकार: राजिंदर कृष्ण। संगीतकार: मदन मोहन। पर्दे पर: जॉनी वॉकर। गाने के बोल। फिल्म के सभी गाने।
जॉनी वॉकर, मोहम्मद रफी और साइकिल; गज़ब की तिकड़ी है! इस तिकड़ी पर एक साइकिल गीत पहले भी कवर किया जा चुका है: बचके बलम चल कि रास्ता है मुश्किल। इस ब्लॉग पोस्ट में जॉनी वॉकर के बारे मे थोड़ी बात की जा चुकी है। आने वाले समय में इनके और साइकिल आने वाले हैं।
आज के साइकिल गीत में फिल्म के हीरो जॉनी वॉकर अपने माता पिता की इच्छा के विरुद्ध सन्यास लेने का निश्चय कर लेते हैं और घर छोड़ के अंगोछा (गमछा) लटकाकर, सर्पदंड (सर्पाकार छड़ी) लिए सड़कों पर नृत्य नुमा कुछ-कुछ करके लड़कियों के लिए ये गाना गाने लगते हैं: हसीनों संभालो अपनी ये दुनिया।
गाने में देखिए इनके चेहरे के हाव भाव; शाहरुख खान की याद आ जाती है! शाहरुख ने जॉनी वॉकर से थोड़ी प्रेरणा जरूर ली होगी!
अभी इन्होंने थोड़ी ही सड़क नापी होती है और पहुंच जाते हैं एक बगीचे में जहाँ नाचती गाती कुछ कमसिन बालाएं प्रकट हो जाती हैं। ऐसी बात है!
दो बालाएं उन्हें घेर भी लेती हैं और एक तो गुदगुदी भी करने लगती हैं! देखिए जरा:
जॉनी वॉकर नाचते-नाचते, गाते-गाते कल्टी मार देते हैं। लेकिन अब चार बालाएं साइकिल से उनका पीछा करती हैं और उन्हें शीघ्र ही पकड़ लेती हैं। ऐसी काम की चीज है साइकिल!
गाने के अंत में जॉनी वॉकर मुरली मोहन बन जाते हैं। सर्पदंड को ही बांसुरी बना देते हैं। गोपिया हैं ही साइकिल पर। नीचे फोटो देखिए। बेहतर होगा गाना भी देख लीजिए।
जीवन के जोड़-तोड़ और योग विन्यास से अच्छा तो जॉनी वॉकर का ये संन्यास है! अब भी मौका है; बन जाओ इनके समान दंडी संन्यासी!
(वैसे, आजकल के दौर की फिल्मों में ऐसे संन्यासी दिखाने का साहस कम निर्माता/ निर्देशक ही करेंगे। इसलिए ऐसे पुराने गाने सहेजने लायक हैं।)
अफसोस, फिल्म की हीरोइन श्यामा इस गाने में नहीं दिखाई गई हैं। लेकिन फिल्म के अन्य गानों में आप जानी वॉकर और श्यामा का रोमांस देख सकते हैं। श्यामा के प्रशंसकों, और कुछ नहीं तो उनका ये पोस्टर ही देख लीजिए। खोटा पैसा भी वसूल हो जाएगा!
पोस्टर! पोस्टर कभी फिल्मों का अभिन्न अंग हुआ करते थे। आज के बच्चे सिनेमा हॉल में पोस्टर देखने के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। हमारे बचपन में हम बच्चे पारसी मोहल्ले से राज टॉकीज तक सिर्फ हॉल के बाहर और अंदर लगे हाथ से बने पोस्टर देखने के लिए जाया करते थे। पोस्टर देखते थे और दोस्तों से लंबे समय तक इन पोस्टर के बारे में चर्चा करते थे।
फिल्म देख आए दोस्तो से फिल्म की कहानी सुना करते थे। फिल्में तो कम ही देखी जाती थीं। लेकिन पोस्टर जरूर देख लेते थे इधर उधर मैगजींस में या टॉकीज़ में। अब शायद आपको श्यामा और जॉनीवॉकर का ऊपरवाला पोस्टर अच्छा लगे! इस पोस्टर कला और पोस्टर बनाने वाले कलाकारों के बारे में जल्दी ही थोड़ी और बातें की जाएंगी।
साइकिल वाला गाना सुना दिया, पढ़ा दिया। स्क्रीनशॉट्स और पोस्टर भी दिखा दिए। मदन मोहन का इस अलग टाइप का लेकिन बेहतरीन संगीत भी समझ लिया। थोड़ी सी दिल की बात भी कह दी। बस, हो गया आज का काम। अब हम भी चले वीरानों में!
पंकज खन्ना
9424810575
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