(3) ओ दूधवाली ग्वालनिया ( सीधा रास्ता 1947)

पंकज खन्ना
9424810575

               
साइकिल संगीत की अगली पिछली ब्लॉग पोस्ट्स: 
(1) साइकल संगीत-परिचय (3/6/2025)
(2) सावन के नज़ारे हैं। (खजांची 1941) 15/8
(3) ओ दूधवाली ग्वालनिया (सीधा रास्ता 1947) 23/8
(5) मेरे घुंघर वाले बाल ( परदेस 1950) 3/9


गीत  🎶: ओ दूधवाली ग्वालानिया। फिल्म 🎬: सीधा रास्ता (1947)। गायक/गायिका🎤: जी एम दुर्रानी, 
पारुल घोष और अमर वर्मा। गीतकार📖 : अमर वर्मा।संगीतकार 🎼: एस. के. पाल। पर्दे पर: कमला कोटनीस, साहू मोडक और साथी।

                   फिल्म: सीधा रास्ता (1947)


आज के साइकिल आधारित गीत में भारतीय फिल्मी संगीत शैली में ग्रामीण सौंदर्य की झलक बहुत अच्छे से दिखाई गई है जैसे: कच्चे रास्ते, हरे-भरे खेत, ग्वालन के हल्के-फुल्के चंचल भाव, पुरुषों का ग्वालन पर मर मिटना, पायल की झंकार, हवा में उड़ता आंचल, फूलों की डाली, उस जमाने की बोलचाल की भाषा। फिल्मी हीरो का  साइकिल चलाते हुए दिल फेंकना और ग्वालन का उस फेंके दिल को तोड़ देना या पकड़ लेना-आप जैसा उचित समझें!



अगर आप भाषाप्रेमी या पुरातन प्रेमी (Antiquarian) या संगीत प्रेमी या साइकिल प्रेमी हैं तो आपको ये गीत बहुत पसंद आयेगा।


गीत के बोल:

ओ दूधवाली ग्वालनिया
तेरी चाल निराली है, तेरी चाल निराली
तेरी चाल निराली, ओ दूधवाली
ओ दूधवाली ग्वालनिया
तेरी चाल निराली है, तेरी चाल निराली
तेरी चाल निराली, ओ दूधवाली
हा हा मेरी चाल निराली, हा हा मेरी चाल निराली

रोते-रोते फिरोगे बाबू, मैं  अखेत पे जाऊँ तो
मुझे न समझो ऐसी-वैसी
मुझे न समझो ऐसी-वैसी
दूधवाली, हाँ दूधवाली, है कोई दूधवाली

तेरी पायल रुनझुन गाए
तेरी पायल रुनझुन गाए
तेरा आँचल उड़-उड़ जाए
मस्त हवा में झूम रही तू

मस्त हवा में झूम रही
फूलों की डाली, दूधवाली ओ
ओ दूधवाली ग्वालनिया
तेरी चाल निराली है, तेरी चाल निराली
तेरी चाल निराली, ओ दूधवाली

तुम छुप-छुप कर क्यों आए
तुम छुप-छुप कर क्यों आए
हाय, कोई देख न जाए
हाय, झाँक रही वन की चिड़िया

हाय, झाँक रही वन की चिड़िया
हँसती हरियाली है, दूधवाली, है कोई दूधवाली
ओ दूधवाली ग्वालनिया
तेरी चाल निराली है, तेरी चाल निराली
तेरी चाल निराली, ओ दूधवाली

ओ दूधवाली ग्वालनिया
तेरी चाल निराली है, तेरी चाल निराली
तेरी चाल निराली, ओ दूधवाली
हा हा मेरी चाल निराली, हा हा मेरी चाल निराली

रोते-रोते फिरोगे बाबू, मैं अखेत पे जाऊँ तो
मुझे न समझो ऐसी-वैसी
मुझे न समझो ऐसी-वैसी
दूधवाली, हाँ दूधवाली, है कोई दूधवाली

तेरी पायल रुनझुन गाए
तेरी पायल रुनझुन गाए
तेरा आँचल उड़-उड़ जाए
मस्त हवा में झूम रही तू

मस्त हवा में झूम रही
फूलों की डाली, दूधवाली ओ
ओ दूधवाली ग्वालनिया
तेरी चाल निराली है, तेरी चाल निराली
तेरी चाल निराली, ओ दूधवाली

तुम छुप-छुप कर क्यों आए
तुम छुप-छुप कर क्यों आए
हाय, कोई देख न जाए
हाय, झाँक रही वन की चिड़िया

हाय, झाँक रही वन की चिड़िया
हँसती हरियाली है, दूधवाली, है कोई दूधवाली
ओ दूधवाली ग्वालनिया

अब तो ज्यादा तड़पाओ ना
ये मेहँदीर पहनो ना

बस आगे कदम ना
बस आगे कदम ना
और आगे बढ़े तो याद रहे
और आगे बढ़े तो याद रहे

मेरा मटका खाली है, दूधवाली है
ओये दूधवाली है
अब तो ज्यादा तड़पाओ ना
ये मेहँदीर पहनो ना

बस आगे कदम ना
बस आगे कदम ना
और आगे बढ़े तो याद रहे
और आगे बढ़े तो याद रहे

मेरा मटका खाली है, दूधवाली है
ओये दूधवाली है।

 (हमारे पूर्वज मर मिटते थे ऐसी मनमोहक अदाओं पर! हमारा भी यही किरदार है! )

अब इस गीत-संगीत की थोड़ी बारीकी से जांच करते हैं: 

सुबह का समय है। मधुर संगीत बजता है और  आठ दस छोरे एक बिल्डिंग  के बाहर एक-एक करके आने लगते हैं। शायद ये उस जमाने का हॉस्टल ही होगा। एक ब्रश कर रहा है, दूसरा दाढ़ी बना रहा है। तीसरा टेनिस का रैकेट लेकर बाहर आ गया है। चौथा हाथ में अखबार लेकर आ गया है।  बाकी भीड़ का हिस्सा हैं, टाइम पास कर रहे हैं। सब गोपीकिसन बने जा रहे हैं।

छिछोरे छोरे बाहर इसलिए आएं हैं क्योंकि वहां दूधवाली ग्वालनिया हाथ और कमर के बीच में मटका थामे मटक मटक कर आ रही हैं। इन छोरों और ग्वालन का वार्तालाप ऊपर लिखे गाने के बोल में पढ़ लें या ये गाना ही देख लें: ओ दूधवाली ग्वालानिया

इन छोरों को वाक् युद्ध  में निपटाने के बाद ग्वालन जाते-जाते एक अन्य आते हुए छोरे को जोर से टल्ला मारके बाहर  कलटी  मार देती हैं। आगे बढ़ती हैं तो अब फिल्म के हीरो नमूदार हो जाते है। वो साइकिल चलाते-चलाते गा रहे हैं : तेरी पायल रुन झुन गाए! 

लड़कों की पुरानी बीमारी है: छोरी दिखी और साइकिल पर स्टंट शुरू! हीरो भी यहीं कर रहे हैं। दोनों हाथ छोड़कर साइकिल चला रहे हैं, गाए  जा रहे हैं, फ्लर्ट किए जा रहे हैं, लाइन मारे जा रहे हैं!

देखो आज के नौजवानों देखो, साइकिल कैसे चलाते हैं, ग्वालन कैसे पटाते हैं! ऐसे नहीं कि साइकिल उठाई, हेलमेट लगाई और 100-200 km  यूं ही नाप नाप दिए बगैर कुछ नैन मटक्का किए! क्या फायदा!?

इनको देखो और सीखो कुछ! लेकिन ये याद रखना कि ग्वालन गाने के अंत में हीरो पर मटकी फोड़ देती है!

हमारे पूर्वजों ने ग्वालन देवियों को शायद इतना परेशान कर दिया कि उन्होंने शहरों में आना ही बंद कर दिया। हमने तो बचपन से लेकर आज तक किसी ग्वालन को ऐसे आते नहीं देखा है जैसा इस गाने में दिखाया गया है! बस ये सब सोचते ही रह गए, और बुजुर्ग हो गए!

(साइकल! संगीत! ग्वालन और उसकी शरमाई मुस्कान!)

काश कोई ग्वालन हमारी साइकिल पर कभी ऐसे बैठती! सोचने में  क्या जा रहा है!?

शहर में जो होता है वो इसके ठीक विपरीत ही होता है। ग्वाले आते हैं और मोहल्ले की लड़कियों को उठा ले जाते हैं! आपको तो याद ही होगा तवा संगीत का वो पारसी मोहल्ले वाला आलेख: सीताराम सटक गए, थाली लोटा पटक गए!

ये फिल्म सीधा रास्ता (1947) कई यादगार गीतों से भरी हुई है। इसके कुछ लोकप्रिय, कुछ भावपूर्ण गीत इस प्रकार हैं: 

आ जा चाँद मेरे आ जा - (शायद पारुल घोष) 


साइकिल चलती रहेगी दोस्तों। अभी तो बस दो ही पैडल मारे हैं। और हर पैडल की चाल में बसा है दिल का सुर!
सौ से ज्यादा पैडल और मारने हैं। बहुत सारे कहानियां-किस्से और दिलकश साइकिल वाले गाने बाकी हैं। आज तो बस यही गुनगुनाइए: ओ दूधवाली ग्वालनिया तेरी चाल निराली!

वैसे भी अब कहां बची ग्वालनियां!? जहां देखो वहां वुमनियां, सिर्फ वुमनियां!

चलो साइकिल चलाते-चलाते मिल कर गाते हैं:

ओ ग्वालनियां! ओ हो ग्वालनियां! 
कहां रे ग्वालनियां, हो हो ग्वालनियां!!


पंकज खन्ना
9424810575

-🚴‍♂️-🚴‍♀️-🚴-🚴‍♂️-🚴‍♀️-🚴-🚴‍♂️-🚴‍♀️-🚴-🚴‍♂️-🚴‍♀️-🚴-

मेरे कुछ अन्य ब्लॉग:

हिन्दी में:

तवा संगीत : ग्रामोफोन का संगीत और कुछ किस्सागोई।
रेल संगीत: रेल और रेल पर बने हिंदी गानों के बारे में।
साइकल संगीत: साइकल पर आधारित हिंदी गाने।
तवा भाजी: वन्य भाजियों को बनाने की विधियां!
मालवा का ठिलवा बैंड: पिंचिस का आर्केस्टा!
ईक्षक इंदौरी: इंदौर के पर्यटक स्थल। (लेखन जारी है।)

अंग्रेजी में:

Love Thy Numbers : गणित में रुचि रखने वालों के लिए।
Epeolatry: अंग्रेजी भाषा में रुचि रखने वालों के लिए।
CAT-a-LOG: CAT-IIM कोचिंग।छात्र और पालक सभी पढ़ें।
Corruption in Oil Companies: HPCL के बारे में जहां 1984 से 2007 तक काम किया।

-🚴‍♂️-🚴‍♀️-🚴-🚴‍♂️-🚴‍♀️-🚴-🚴‍♂️-🚴‍♀️-🚴-🚴‍♂️-🚴‍♀️-🚴-



Popular posts from this blog

(1) साइकिल संगीत: परिचय

(2) सावन के नज़ारे हैं।