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(A) साइकिल गीतों की क्रमानुसार सूची।

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पंकज खन्ना 9424810575              साइकिल संगीत - परिचय । (A) साइकिल गीतों की क्रमानुसार सूची । (B) साइकिल गीत चुनने का मानदंड (Criteria)? (C) साइकिल संगीत क्यों? और हिंदी में ही क्यों? (D) साइकिल संगीत पर पुस्तक क्यों नहीं? (E) ब्लॉग में कमेंट्स सेक्शन क्यों बंद है ? (F) साइकिल गीतों का वर्गीकरण । साइकिल संगीत के पोस्ट्स की संक्षिप्त सूची लिंक्स के साथ: (1) साइकल संगीत परिचय :  (2) सावन के नज़ारे हैं ।  (3) ओ दूधवाली ग्वालानिया ।  (4) ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया ।  (5) मेरे घुंघर वाले बाल !  (6) एक दिन लाहौर की ठण्डी सड़क पर  (7) ओ साइकिल वाले बाबू ।  (8) आया रे आया रे आया रे भाजीवाला   (9) देखी-देखी पंछी, देखी ये फुलवारी ।  (10) सांवले सलोने दिन आए बहार के ।  (11) बड़े भैया लाए हैं लंदन से छोरी । (12) हमको हँसते देख ज़माना जलता है ।(13) चले बजाते  सीटी, जीवन की राहों में ।  (14) बचके बलम चल कि रास्ता है मुश्किल ।  (15) हो लाख मुसीबत...

(39) हम मतवाले नौजवान।

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पंकज खन्ना 9424810575              साइकिल संगीत - परिचय । (A) साइकिल गीतों की क्रमानुसार सूची । (B) साइकिल गीत चुनने का मानदंड (Criteria)? (C) साइकिल संगीत क्यों? और हिंदी में ही क्यों? (D) साइकिल संगीत पर पुस्तक क्यों नहीं? (E) ब्लॉग में कमेंट्स सेक्शन क्यों बंद है ? (F) साइकिल गीतों का वर्गीकरण । आज का गाना: (39)  हम मतवाले नौजवान ।  गाना : हम मतवाले नौजवान । फिल्म :  शरारत(1959)। गायक : किशोर कुमार। गीतकार : हसरत जयपुरी। संगीतकार : शंकर जयकिशन। पर्दे पर : किशोर कुमार और साथी। गाने के बोल । फिल्म के सभी गाने । "हम मतवाले नौजवान" किशोर कुमार के शुरुआती जोशीले युवा ऊर्जा वाले गीतों में से एक है। खुशकिस्मती से ये साइकिल गीत भी है। ये समाज की संकीर्ण सोच के विरुद्ध एक मस्त, बेबाक ऐलान जैसा लगता है। गीतकार हसरत जयपुरी की लिखी इसकी  पहली ही लाइन, "हम मतवाले नौजवान, मंज़िलों के उजाले..." उस दौर के युवाओं के आत्मविश्वास और आशावाद का प्रतीक है। पहले ऐसे नौजवान होते थे जो खुद को मतवाले नौजवान बोलते थे और मानते भी थे। (दुःख होता...

(38) ज़िंदगी में रंग भरा है प्यार का।

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पंकज खन्ना 9424810575              साइकिल संगीत - परिचय । (A) साइकिल गीतों की क्रमानुसार सूची । (B) साइकिल गीत चुनने का मानदंड (Criteria)? (C) साइकिल संगीत क्यों? और हिंदी में ही क्यों? (D) साइकिल संगीत पर पुस्तक क्यों नहीं? (E) ब्लॉग में कमेंट्स सेक्शन क्यों बंद है ? (F) साइकिल गीतों का वर्गीकरण । आज का गीत : ज़िंदगी में रंग भरा है प्यार का । गाना : ज़िंदगी में रंग भरा है प्यार का । फिल्म : बस कंडक्टर(1959)।  गायक : रफ़ी। गायिका : आशा भोंसले।  गीतकार : नूर देवासी। संगीतकार : बिपिन बाबुल। पर्दे पर : श्यामा और प्रेमनाथ। गाने के बोल । फिल्म के सभी गाने । ज़रा अपनी आँखें बंद कीजिए और 50-60 के दशक वाले उस सुनहरे दौर में आज फिर लौट आइए हमारे साथ। एक बेहद सुहाना हरियाली से सजा हुआ जंगली या ग्रामीण रास्ता है। रास्ते के बीच में एक पुरानी यादों वाला खूबसूरत विंटेज पुल भी नज़र आता है। और इसी दिलकश नज़ारे के बीच इस पुल के ऊपर से ही अपनी-अपनी साइकिलों पर एंट्री लेते हैं हमारे आज के हीरो बस कंडक्टर प्रेमनाथ और मनमोहक अदाओं वाली हीरोइन श्याम...

(37) ज़रा बचके चलना, ज़रा हट के चलना, कि शाही खटारा चला आ रहा है।

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पंकज खन्ना 9424810575              साइकिल संगीत - परिचय । (A) साइकिल गीतों की क्रमानुसार सूची । (B) साइकिल गीत चुनने का मानदंड (Criteria)? (C) साइकिल संगीत क्यों? और हिंदी में ही क्यों? (D) साइकिल संगीत पर पुस्तक क्यों नहीं? (E) ब्लॉग में कमेंट्स सेक्शन क्यों बंद है ? (F) साइकिल गीतों का वर्गीकरण । आज का गीत: (37) ज़रा बच के चलना, ज़रा हट के चलना कि शाही खटारा चला आ रहा है। लगी है भूख हमको, बजे हैं पौने बारा। ये आलू बुखारा लो अब आ रहा है!                 (निशि कोहली।) गाना :  ज़रा बच के चलना, ज़रा हट के चलना कि शाही खटारा चला आ रहा है ।  फिल्म : क्या ये बॉम्बे है (1959)। गायक : मोहम्मद रफ़ी। गायिका : आशा भोंसले।  गीतकार: नूर देवासी। संगीतकार : बिपिन दत्ता।   परदे पर : मारुती परब, निशि कोहली, सखियाँ और एक शाही खटारा साइकिल रिक्शा। गाने के बोल । फिल्म के सभी गाने । गाने की शुरुआत में फिल्म के हीरो मारुति एक टूटी फूटी मालवाहक साइकिल रिक्शा को हांक कर चलाते हुए दिखाई देते ...

(36) ये बॉम्बे शहर का बड़ा नाम है।

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पंकज खन्ना 9424810575              साइकिल संगीत - परिचय । (A) साइकिल गीतों की क्रमानुसार सूची । (B) साइकिल गीत चुनने का मानदंड (Criteria)? (C) साइकिल संगीत क्यों? और हिंदी में ही क्यों? (D) साइकिल संगीत पर पुस्तक क्यों नहीं? (E) ब्लॉग में कमेंट्स सेक्शन क्यों बंद है ? (F) साइकिल गीतों का वर्गीकरण । आज का गीत: (36)  ये बॉम्बे शहर का बड़ा नाम है। पर गड़बड़ घोटाले का हर काम है। (फिल्म 'क्या ये बॉम्बे है' के कलाकार।) गाना :   ये बॉम्बे शहर का बड़ा नाम है । पर गड़बड़ घोटाले का हर काम है।  फिल्म : क्या ये बॉम्बे है (1959)। गायक : मोहम्मद रफ़ी। गीतकार:  नूर देवासी। संगीतकार : बिपिन दत्ता। हीरो : मारुति। हीरोइन : निशी कोहली। परदे पर : मारुती परब, मुंशी मुनक्का, बंबई की सड़कें, बिल्डिंग्स, बस, लोकल ट्रेन और एक साइकिल। गाने के बोल । फिल्म के सभी गाने । आज का गाना साइकिल गीत के साथ-साथ रेल गीत भी है। इस गीत को रेल संगीत में पहले ही कवर किया जा चुका है।  रेल संगीत की ब्लॉग पोस्ट की कॉपी करके और थोड़ा सा मसाला और डाल के ...

(35) इरीरी राका, आका का बाका, बाका का टाका... दो उस्ताद (1959).

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पंकज खन्ना 9424810575              साइकिल संगीत - परिचय । (A) साइकिल गीतों की क्रमानुसार सूची । (B) साइकिल गीत चुनने का मानदंड (Criteria)? (C) साइकिल संगीत क्यों? और हिंदी में ही क्यों? (D) साइकिल संगीत पर पुस्तक क्यों नहीं? (E) ब्लॉग में कमेंट्स सेक्शन क्यों बंद है ? (F) साइकिल गीतों का वर्गीकरण । आज का गीत: (35) इरीरी राका, आका का बाका, बाका का टाका । गाना:  इरीरी राका, आका का बाका, बाका का टाका । फिल्म : दो उस्ताद(1959)। गायक : रफ़ी। गीतकार : क़मर जलालाबादी। संगीतकार : ओ पी नैय्यर। पर्दे पर : राज कपूर। गाने के बोल । फिल्म के सभी गाने । गाने के बारे में एक बात पहले ही साफ कर दी जाए। ये सही मायनों में एक साइकिल गीत नहीं है। लेकिन ब्लॉग सीरीज़ में   साइकिल गीत के  नियम  जो बनाए गए हैं, उनमें ये फिट बैठता है। क्योंकि गाने में थोड़ी देर के लिए  राज कपूर एक Tandem Cycle पर सवार होते हैं! गाना सुनने, समझने और इस ब्लॉग पोस्ट को पढ़ने के बाद शायद आपको भी लगेगा कि अच्छा हुआ इसे साइकिल गीत मान लिया गया है! ये एक अनोखे...

(34) लहरों में झूल के।

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  पंकज खन्ना 9424810575              साइकिल संगीत - परिचय । (A) साइकिल गीतों की क्रमानुसार सूची । (B) साइकिल गीत चुनने का मानदंड (Criteria)? (C) साइकिल संगीत क्यों? और हिंदी में ही क्यों? (D) साइकिल संगीत पर पुस्तक क्यों नहीं? (E) ब्लॉग में कमेंट्स सेक्शन क्यों बंद है ? (F) साइकिल गीतों का वर्गीकरण । आज का गीत :  लहरों में झूल के , खुशियों में फूल के, देखो जी दीवाने हॉलिडे मनाने चले, लिखना-पढ़ना भूल के।             ( सुबीराज और कुमकुम) गीत : लहरों में झूल के । फिल्म : दो गुंडे (1959)। गायक : रफी। गायिका : आशा भोंसले। गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरी। संगीतकार : गुलाम मोहम्मद। पर्दे पर : सुबीराज, कुमकुम, अजीत, प्राण और अन्य। गाने के बोल । फिल्म के सभी गाने । " लहरों में झूल के , खुशियों में फूल के, देखो जी दीवाने हॉलिडे मनाने चले, लिखना-पढ़ना भूल के " एक बड़ा ही चंचल और कम सुना गया लेकिन बेहद दिलकश साइकिल और पिकनिक गीत है। इस गीत को सुबीराज कक्कड़,  कुमकुम, प्राण, अजीत और अन्य साथी कलाकारों पर फिल्मा...