(33) सुनो रे भैया हम लाए हैं एक खबर मस्तानी।


आज का गाना: (33) सुनो रे भैया हम लाए हैं एक खबर मस्तानी। आज किसी ज़ालिम की मरने वाली है नानी।


( मित्र दीपक राजोरिया को जॉनी वॉकर 
बहुत पसंद हैं तो उनकी तस्वीर को थोड़ा सा सँवार दिया है!)

गीत: सुनो रे भैया हम लाए हैं एक खबर मस्तानी। फिल्म: पैगाम (1959)।गायक: रफी। गीतकार: प्रदीप। संगीतकार: सी रामचंद्र। पर्दे पर: जॉनी वॉकर। गाने के बोलफिल्म के सभी गाने। (फिल्म में जॉनी वॉकर पर तीन गीत फिल्माए गए हैं।)

आज का साइकिल गीत एक मस्ती भरा हास्य गीत भी है: "सुनो सुनो रे भैया हम लाए हैं एक खबर मस्तानी।" 

फिल्म का विषय मिल-मज़दूरों के अधिकार, अमीर-गरीब का संघर्ष और सामाजिक न्याय है। गाने की शुरुआत में मजदूरों के हितैषी  दिलीप कुमार मजदूरों को मिल के मालिक के विरोध में भाषण देते हुए दिखाई देते हैं।

भाषण समाप्त होते ही मोर्चे की कमान नंदू (जॉनी वॉकर) अपने हाथों में ले लेते हैं। फिर उनके नेतृत्व में मिल के मुख्य द्वार से लेकर मिल-मालिक सेठ सेवकराम (मोतीलाल) के घर तक सभी मजदूर साइकिलों पर एक संगीतमय लेकिन अनुशासित जुलूस निकालते हैं। इस पूरे सफ़र के दौरान वे साइकिल चलाते हुए सामूहिक स्वर में यही गीत गाते चलते हैं।

ऐसे गंभीर कथानक के बीच यह गीत हास्य और व्यंग्य का तड़का लगाता है। जॉनी वॉकर लोगों को पुकारते हुए घोषणा करते हैं कि अब अत्याचारी और बेईमान लोगों की पोल खुलने वाली है: आज किसी ज़ालिम की मरने वाली है नानी!

गीत के अंत में जॉनी वॉकर अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ सेठ के घर पहुँचते हैं। फिर अपनी ख़ास अजब-ग़ज़ब अदा, लचकते, मटकते और चिर-परिचित अंदाज़ में बोलते हुए, वो सेठ को हड़ताल का नोटिस थमा देते हैं। यह छोटा-सा दृश्य जॉनी वॉकर की निराली कॉमिक टाइमिंग का एक जानदार और शानदार नमूना है।

आगे क्या हुआ!? ये तो आपको  देखकर ही अच्छे से समझ आएगा। इतना भी क्या सोचना, ये लिंक दबाकर गाना देख ही डालिए ना!

'जॉनी वॉकर' ब्लैक लेबल लगाते हुए ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के किंग  कॉमेडियन जॉनी वॉकर को देखने से क्या ज्यादा मजा आएगा!? पता नहीं, लेकिन बगैर सेवन किए भी सुरूर आयेगा और करार भी!

जब जॉनी वॉकर पर गाना फिल्माया गया हो तो गाने को किसने, कब और क्यों लिखा है या किसने संगीत दिया है; बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता है।

फिर भी कवि प्रदीप ने इस गीत में तीखा सामाजिक व्यंग्य बहुत हल्के-फुल्के अंदाज़ में पिरोया है। सी. रामचंद्र ने लोकधुन जैसी सरल, चलायमान धुन बनाई है, जिससे गीत तुरंत जुबान पर चढ़ जाता है।

मोहम्मद रफ़ी ने हमेशा के समान जॉनी वॉकर की शरारती अदाओं के अनुरूप चंचल, नटखट और नाटकीय गायकी की है।

साइकिल संगीत की मेन हीरोइन साइकिल ही है। लेकिन जॉनी वॉकर के पर्दे पर आ जाने के बाद दोनों ही सुपरस्टार हो जाते हैं।

और इन दोनों सुपरस्टार्स को आप नीचे लिखे  तीन साइकिल गीतों में देख चुके हैं:


अगर पहले इन्हें देखने-पढ़ने का मौका नहीं मिला था तो अब लपक के पढ़ लें!

बाकी बातें फिर कभी कर लेंगे। साइकिल और संगीत तो हम सब के घर की खेती रही है।


पंकज खन्ना 

9424810575



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