(30) ओ सोनिये ओ सोनिये जब जीत हुई है हमारी।


(गीता बाली और सुरेश: 10 O' Clock.)


गीत:ओ सोनिये ओ सोनिये जब जीत हुई है हमारीफिल्म: 10 O' Clock(1958) गायक: रफ़ी। गायिका: गीता दत्त। गीतकार: श्याम हिंदी। संगीतकार: राम गांगुली। पर्दे पर: गीता बाली, सुरेश (नसीम अहमद) और साथी। गाने के बोलफिल्म के सभी गाने
ये साइकिल का पिकनिक वाला गाना हमें  चुलबुली  अदाकारा गीता बाली के कारण बहुत पसंद है। उनके अलावा  इस गीत को पूर्ण करने के लिए दो कम जाने पहचाने कलाकार भी हैं: हीरो सुरेश और गीतकार श्याम हिंदी। पहले इन दोनों को याद कर लेते हैं।

(सुरेश 1928-1979.जन्म: गुरुदासपुर। )

इनका असली नाम था नसीम अहमद। इसलिए इन्हें एन ए सुरेश के नाम से भी जाना जाता है। 1950 के दशक में उन्होंने  मधुबाला (दुलारी) , सुरैया (दीवाना), वैजयंतीमाला (यास्मीन), नलिनी जयवंत( जादू ), पद्मिनी (कैदी), अमिता (तीन उस्ताद), श्यामा ( चार चांद), निगार सुल्ताना (रिश्ता) और गीता बाली (10 O' Clock)  के साथ फिल्में की थीं।


उन्हें दुलारी (1949) में उनके रोल के लिए सबसे ज़्यादा जाना और पहचाना जाता है, खासकर मोहम्मद रफी के अमर गाने "सुहानी रात ढल चुकी" के लिए।

गीतकार श्याम हिंदी के बारे में नेट पर कुछ ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।  उन्होंने कुछ ही फिल्मों में लगभग सौ गाने लिखे हैं। उनके लिखे सभी गानों को इस लिंक से पढ़ या सुन सकते हैं।

'श्याम' नाम के बहुत सारे  कलाकार हुए हैं, जैसे हीरो श्याम कुमार, विलेन श्याम, गायक श्याम,  संगीतकार श्याम सुंदर, गीतकार श्यामलाल बाबू राय ( इंदीवर) और अब गीतकार श्याम हिंदी। साउथ के श्याम तो अभी गिने ही नहीं है। इस नाम की उलझी डोर को एक बार  रेल संगीत में सुलझाने की कोशिश की थी। अब फिर 'श्याम-श्याम' शुरू किया तो शाम हो जाएगी। श्याम बाबू को छोड़कर, राम बाबू पर आ जाते हैं बाऊजी।

आज भले ही कम जाने जाते हों, लेकिन इस गाने के संगीतकार राम गांगुली अपने समय के बड़े संगीतकार थे। राम गांगुली ने राज कपूर की डायरेक्टर के तौर पर पहली फ़िल्म "आग" के लिए संगीत दिया था और एक प्रकार से आग ही लगा दी थी। फोटो में भी दिखेगी, ग्रामोफोन से निकलते हुए! ( अनु मलिक ने तो बहुत बाद में बोलना शुरू किया: आग लगा दूंगा, आग लगा दूंगा!)

          राम गांगुली (1928-1983)

राज कपूर के साथ राम गांगुली की अगली और आखिरी फ़िल्म बरसात (1949) थी। 'बरसात'  हो गई तो इस काबिल जोड़ी की 'आग' भी बुझ गई। लेकिन उनका संगीत नहीं बुझा, आज भी हॉट है।

उनका पहला प्रसिद्ध गीत था: ज़िंदा हूँ इस तरह । फिल्म आग का ही ये गीत भी बहुत पसंद किया गया है: काहे कोयल शोर मचाए रे

अब बात होगी आज के गाने की और गीता बाली की। 


            गीता बाली (1930-1965) 


गीता बाली की स्वाभाविक अदाएं और जबरदस्त टाइमिंग अन्य अभिनेत्रियों से काफी अलग होती थीं।  सबसे सुंदर अभिनेत्री तो शायद नहीं कही जा सकती थीं, लेकिन उनमें मंत्रमुग्ध कर देने वाला गजब का आकर्षण था। वो सच में सबसे दिलचस्प अभिनेत्रियों में से एक हैं। ट्रेजेडी, कॉमेडी या रोमांस कैसा भी रोल हो वो अच्छे से, उमंग और उत्साह से करती थीं। (उन पर फिल्माए गए इस प्यारे रेल गीत को भी याद करें: मुझे सच सच बता दो  फिल्म : बावरे नयन।)


आज के साइकिल गीत में लड़कों और लड़कियों की टोलियां साइकिल पर अलग-अलग पिकनिक मनाने निकली हैं। जाहिर है, रास्ते में टक्कर तो होनी ही थी। हुई भी! आप पहले भी साइकिल संगीत में ऐसी टक्करें देख चुके हैं।

टक्कर के बाद गीता बाली नाडिया हंटरवाली बन जाती हैं और हीरो की कुटाई कर देती हैं, लात घूंसे मारकर। कह सकते हैं कि हीरो की पुंगी बजा देती हैं।

            ( एडिटेड स्क्रीन शॉट्स)


तो ये था गाने का बैकग्राउंड। गीता बाली स्क्रीन पर हों और आवाज गीता दत्त की तो मजा तो आएगा ही। और फिर साथ में रफी भी हों तो मज़ा कई गुना बढ़ जाता है।

लड़कियां गीता बाली के नेतृत्व में साइकिल पर चले जा रही हैं। गीता बाली साइकिल चलाते-चलाते पुंगी बजा रही हैं। और फिर सभी लड़कियां गाए जा रही हैं: ओ सोनिये ओ सोनिये जब जीत हुई है हमारी। 

सुरेश माउथ ऑर्गन बजाते हुए साइकिल चला रहे हैं  और लड़कों की टोली भी उनके साथ यही गा रही है।

गीत लिखा श्याम ने है, संगीत राम का है, और गीता ज्ञान बांटा जा रहा है: ओ सोनिये ओ सोनिये जब जीत हुई है हमारी, क्यों ना हम शान से चलें। बड़ा धार्मिक गीत  है! प्रेरणात्मक गीत भी है: शान से चलें।

पिकनिक स्थल पर पहुंचकर गीता बाली फिर से मस्त पुंगी बजाना शुरू कर देती हैं और सुरेश  हाथ में बैडमिंटन का रैकेट लेकर नाच गाना करते हैं। वैसे गीता बाली की पुंगी के आगे तो ये बस झुनझुना ही रह जाता है। लड़कों ने बीच-बीच में छोरे होने का परिचय दिया है और  सीटियां मारी हैं। बस उनका इतना ही अचीवमेंट रहा है जीवन में। लेकिन काफी है! भिया बिल्कुल आपके और हमारे समान!

वैसे कह सकते हैं कि ये भी एक सीटी गीत है। सीटी के बगैर बने गीतों पर तो बैन लगा देना चाहिए!

बस ऐसी ही चुलबुली हरकतों के साथ दोनों टीमें हंसते-खेलते पिकनिक मनाकर घर लौट जाती हैं और हमें दे जाती हैं होमवर्क: लिखो एक और साइकिल गीत!

लिख ही दिया है आप सब के लिए  हंसते खेलते, सीटी बजाते-बजाते। जब जीत हुई है हमारी तो क्यों न हम शान से चलें! 😊🙏


पंकज खन्ना 

9424810575



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