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Showing posts from August, 2025

(4) ए मोहब्बत उनसे मिलने का बहाना मिल गया। बाजार (1949) ।

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पंकज खन्ना 9424810575                 साइकिल संगीत की अगली पिछली ब्लॉग पोस्ट्स:  (1) साइकल संगीत- परिचय  (3/6/2025) (2)  सावन के नज़ारे हैं।  (खजांची 1941) 15/8 (3)  ओ दूधवाली ग्वालनिया  (सीधा रास्ता 1947) 23/8 (4)  ए मोहब्बत उनसे मिलने  ( बाजार 1949) 29/8 (5)  मेरे घुंघर वाले बाल  ( परदेस 1950) 3/9 (6)  एक दिन लाहौर की ठंडी  (सगाई 1951) 10/9 आज का गीत : ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना ... गीत 🎶: ऐ मुहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया । फिल्म 🎬: बाज़ार (1949) गायक 🎤: रफ़ी।  गायिका 🎤:  लता। गीतकार  📖  : क़मर जलालाबादी।  संगीतकार  🎼 : श्याम सुंदर और हुस्नलाल भगतराम।  पर्दे पर:   निगार सुल्तान और श्याम। गाने के बोल: ऐ मोहब्बत उनसे मिलने,  ऐ मोहब्बत उनसे मिलने का बहाना बन गया।  तुमने देखा हमने देखा, तुमने देखा हमने देखा  इक फसाना बन गया।  ऐ मोहब्बत...

(3) ओ दूधवाली ग्वालनिया ( सीधा रास्ता 1947)

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पंकज खन्ना 9424810575                 साइकिल संगीत की अगली पिछली ब्लॉग पोस्ट्स:  (1) साइकल संगीत- परिचय  (3/6/2025) (2)  सावन के नज़ारे हैं।  (खजांची 1941) 15/8 (3)  ओ दूधवाली ग्वालनिया  (सीधा रास्ता 1947) 23/8 (4)  ए मोहब्बत उनसे मिलने  ( बाजार 1949) 29/8 (5)  मेरे घुंघर वाले बाल  ( परदेस 1950) 3/9 (6)  एक दिन लाहौर की ठंडी  (सगाई 1951) 10/9 आज का साइकिल गीत: ओ दूधवाली ग्वालानिया तेरी चाल निराली! गीत  🎶: ओ दूधवाली ग्वालानिया ।  फिल्म 🎬:  सीधा रास्ता (1947)। गायक/गायिका 🎤: जी एम दुर्रानी,  पारुल घोष और अमर वर्मा। गीतकार 📖  : अमर वर्मा। संगीतकार  🎼 : एस. के. पाल। पर्दे पर : कमला कोटनीस, साहू मोडक और साथी।                    फिल्म: सीधा रास्ता (1947) आज के साइकिल आधारित गीत में भारतीय फिल्मी संगीत शैली में ग्रामीण सौंदर्य की झलक बहुत अच्छे से दिखाई गई है जैसे: कच्चे रास्ते, हरे-भरे खेत, ग्व...

(2) सावन के नज़ारे हैं।

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पंकज खन्ना 9424810575                 साइकिल संगीत की अगली पिछली ब्लॉग पोस्ट्स:  (1) साइकल संगीत- परिचय  (3/6/2025) (2)  सावन के नज़ारे हैं।  (खजांची 1941) 15/8 (3)  ओ दूधवाली ग्वालनिया  (सीधा रास्ता 1947) 23/8 (4)  ए मोहब्बत उनसे मिलने  ( बाजार 1949) 29/8 (5)  मेरे घुंघर वाले बाल  ( परदेस 1950) 3/9 (6)  एक दिन लाहौर की ठंडी  (सगाई 1951) 10/9   साइकल संगीत की प्रस्तावना हो गई थी, परिचय भी हो गया था। बस थोड़ा तवा भाजी में उलझ गए। गाने के साथ खाना भी तो जरूरी है! काम चलाऊ पेट भर गया है, अब फिर से अपनी औकात पर आ जाते हैं! तवा भाजी के ढाबे को कुछ दिनों के लिए पीछे छोड़कर वापस लौटते हैं। संगीत पर आ जाते हैं, साइकल के साथ।  गान काज कीन्हें बिनु, मोहि कहाँ विश्राम! कुछ दिनों के लिए भूल जाते हैं ख़ावन के नज़ारे। और अब देखते हैं सावन के नज़ारे...! हिंदी फिल्म संगीत में सबसे पहले कौन से गाने में साइकल दिखाई दी थी? बड़ा मुश्किल सवाल है! तीस के दशक की फिल्मों में साइक...